Chhattisgarh Migrant Worker Lynching | दलित (सतनामी) प्रवासी मजदूर की मॉबलिंचिंग, GSS-LSU ने की उच्चस्तरीय जांच की मांग
रायपुर/अंबिकापुर/केरल: छत्तीसगढ़ के सतनामी (दलित) समाज से ताल्लुक रखने वाले एक प्रवासी मजदूर की केरल में मॉबलिंचिंग कर हत्या किए जाने की दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। मृतक की पहचान रामनारायण बघेल (40 वर्ष), निवासी जिला सक्ति (छत्तीसगढ़) के रूप में हुई है। आरोप है कि 17 दिसंबर 2025 को केरल के पलक्कड़ जिले में उसे ‘बांग्लादेशी घुसपैठिया’ बताकर भीड़ ने पीट-पीटकर मार डाला।
VIDEO देखकर पहचान, पुलिस ने कहा— लाश ले जाइए!
इस सनसनीखेज मामले की जानकारी CPI (ML-रेड स्टार) के केरल साथियों ने छत्तीसगढ़ स्टेट कमेटी सचिव का. सौरा यादव को दी, जिसके बाद गुरुघासीदास सेवादार संघ (GSS) और लोक सिरजनहार यूनियन (LSU) को सूचित किया गया।
GSS प्रमुख लखन सुबोध और LSU महासचिव वीरेंद्र भारद्वाज ने केरल में मौजूद छत्तीसगढ़ी प्रवासी मजदूर शशिकांत से फोन पर बातचीत की। शशिकांत ने बताया कि मृतक रामनारायण बघेल अस्वस्थ होने के कारण केरल से अपने घर लौट रहा था, तभी रास्ते में उसे नफरत फैलाने वाले तत्वों ने घेर लिया और बांग्लादेशी बताकर बेरहमी से पीटा।
पुलिस को शव से एक मोबाइल नंबर मिला, जो मृतक के भाई शशिकांत का था। पुलिस ने संपर्क कर एक वीडियो दिखाया, जिसमें रामनारायण को बांग्लादेशी कहकर पीटते हुए देखा जा रहा है। इसके बाद पुलिस ने कहा कि मर्चुरी में रखी लाश ले जाओ।
पीछे रह गए बूढ़ी मां, पत्नी और दो मासूम बच्चे
शशिकांत ने पुलिस को बताया कि मृतक की बूढ़ी मां, पत्नी और दो छोटे-छोटे बच्चे हैं। परिवार के पहुंचने के बाद ही आगे की प्रक्रिया संभव होगी।
इस घटना की जानकारी मिलते ही GSS/LSU की एक टीम जिला सक्ति रवाना हो गई है, जो पीड़ित परिवार से मिलकर आगे की कार्रवाई और सहायता को लेकर कदम उठाएगी।
लेफ्ट शासित केरल में नफरत की राजनीति? सवालों के घेरे में सरकार
GSS/LSU ने इस घटना को गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन बताते हुए कहा है कि यदि लेफ्ट शासित केरल जैसे राज्य में भी इस तरह की धार्मिक-भौगोलिक नफरत के चलते मॉबलिंचिंग हो रही है, तो यह शासन और प्रशासन की लापरवाही और लक्ष्य से भटकाव को दर्शाता है।
संगठनों ने मांग की है कि—
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मामले की उच्चस्तरीय, निष्पक्ष जांच कराई जाए
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दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दी जाए
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पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता और सुरक्षा प्रदान की जाए
देशभर के मजदूरों में दहशत
इस घटना के बाद देशभर में काम कर रहे छत्तीसगढ़ी प्रवासी मजदूरों में डर और आक्रोश का माहौल है। सवाल उठ रहा है कि अगर पहचान के शक में भीड़ कानून हाथ में ले लेगी, तो मजदूर सुरक्षित कैसे रहेंगे?
