ढाका/नई दिल्ली। बांग्लादेश एक बार फिर राजनीतिक तूफ़ान की चपेट में है। नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार के खिलाफ देशभर में विद्रोह की लपटें तेज हो गई हैं। सूत्रों के मुताबिक, यूनुस सरकार के खिलाफ यह तख्तापलट किसी और के नहीं, बल्कि पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की पार्टी के कार्यकर्ताओं द्वारा किया जा रहा है — और इसमें सेना के कुछ शीर्ष अधिकारियों का भी समर्थन मिलने की खबर है।
13 नवंबर को “बड़ा धमाका” – ढाका में लॉकडाउन की तैयारी
खुफिया रिपोर्टों के अनुसार, 13 नवंबर को एक बड़े विद्रोह की योजना बनाई गई है। राजधानी ढाका में तनाव चरम पर है। शेख हसीना की पार्टी के समर्थक सड़कों पर उतर आए हैं और ढाका को छावनी में तब्दील कर दिया गया है।
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142 से ज्यादा जगहों पर 7000 से अधिक पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं।
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कई इलाकों में इंटरनेट और मोबाइल सेवाएँ आंशिक रूप से बाधित कर दी गई हैं।
🇮🇳 भारत बना हसीना का संकटमोचक – एक कॉल ने बदल दी सत्ता की चाल?
खास बात यह है कि इस संकट के बीच भारत की भूमिका बेहद अहम बताई जा रही है। सूत्रों के अनुसार, दिल्ली से हुई एक ‘महत्वपूर्ण फोन कॉल’ ने ढाका की सियासी बाज़ी पलट दी।
बीते वर्ष अवामी लीग सरकार के पतन के बाद से बांग्लादेश में राजनीतिक अस्थिरता जारी थी। अब जब यूनुस सरकार पर संकट गहराया, तो भारत ने फिर शेख हसीना के पक्ष में कूटनीतिक सक्रियता बढ़ा दी है।
पाकिस्तान की हलचल और भारत का जवाब
स्थिति तब और संवेदनशील हो गई जब रिपोर्ट आई कि पाकिस्तान का एक युद्धपोत बांग्लादेशी जल सीमा में देखा गया, जिसके बाद भारतीय खुफिया तंत्र ने भी हाई अलर्ट जारी कर दिया। इसके तुरंत बाद भारत ने रणनीतिक मोर्चे पर बड़ा कदम उठाया, जिसकी जानकारी सुरक्षा कारणों से सार्वजनिक नहीं की गई है।
यूनुस ने अपने घर को बनाया किला
मोहम्मद यूनुस इस समय ढाका में अपने आवास में हैं और उन्होंने घर को किले में तब्दील कर दिया है। सेना और पुलिस की गतिविधियाँ बढ़ने से स्पष्ट संकेत मिल रहा है कि इंटरिम गवर्नमेंट पर सैन्य कब्ज़े की तैयारी की जा रही है।
हसीना, बाइडेन और “विदेशी हाथ” का नया विवाद
इधर, पूर्व मंत्री और हसीना समर्थकों ने दावा किया है कि इस राजनीतिक उथल-पुथल के पीछे विदेशी हाथ, ख़ासकर अमेरिकी राजनीति से जुड़े बाइडेन-क्लिंटन गुटों का प्रभाव, देखा जा रहा है। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हो पाई है।
क्या फिर सत्ता में लौटेंगी शेख हसीना?
सबसे बड़ा सवाल यही है — क्या भारत के समर्थन और सैन्य हलचल के बीच शेख हसीना की वापसी बांग्लादेश में तय है?
पीएम मोदी और हसीना के बीच वर्षों से रहे ‘सामरिक विश्वास’ के रिश्ते अब एक निर्णायक मोड़ पर हैं। अगर यूनुस सरकार गिरती है, तो ढाका में सत्ता परिवर्तन के साथ भारत का प्रभाव फिर से मजबूत होता दिख सकता है।
