महासमुंद। वंदे मातरम् के 150वें वर्षगांठ के अवसर पर पूरे देश में आज से वर्षभर चलने वाला राष्ट्रभक्ति उत्सव शुरू हुआ। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पहले चरण के कार्यक्रम का शुभारंभ किया और प्रातः 10 से 11 बजे तक इसे देशभर में सीधा प्रसारण किया गया। प्रधानमंत्री के उद्बोधन के बाद पूरे देश में एक साथ वंदे मातरम् का सामूहिक गायन किया गया।
विधायक योगेश्वर राजू सिन्हा ने कहा कि वंदे मातरम् केवल गीत नहीं, बल्कि भारत की आत्मा का स्वर है। यह नई पीढ़ी को देशभक्ति, कर्तव्यनिष्ठा और राष्ट्रीय चेतना से जोड़ने का महत्वपूर्ण साधन है।
छत्तीसगढ़ बीज निगम के अध्यक्ष चंद्रहास चंद्राकर ने कहा कि वंदे मातरम् की रचना 7 नवंबर 1875 को हुई थी और 1882 में इसे बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने उपन्यास आनंदमठ में प्रकाशित किया। यह गीत स्वतंत्रता संग्रामकारियों का अमर वाक्य बन गया और आज भी मातृभूमि के प्रति अटूट प्रेम का प्रतीक है।
जिला स्काउट एवं गाइड के अध्यक्ष येतराम साहू ने बताया कि बंकिम चंद्र चटर्जी बंगाल के प्रमुख साहित्यकार थे, जिन्होंने उपन्यास, कविता और निबंधों के माध्यम से राष्ट्रवाद की अलख जगाई। आनंदमठ, कपालकुंडला, दुर्गेश नंदिनी और देवी चौधरानी जैसी रचनाओं में उन्होंने सामाजिक जकड़न और गुलामी के खिलाफ चेतना जगाई। 1905 में कलकत्ता में वंदे मातरम् संगठन की स्थापना हुई और इसके सदस्य हर रविवार प्रभात फेरी निकालते हुए वंदे मातरम् गाते थे।
इस वर्षभर चलने वाले उत्सव का उद्देश्य राष्ट्र गौरव, जनभागीदारी और मातृभूमि के प्रति समर्पण की भावना को देशभर में सक्रिय बनाना है।
