छत्तीसगढ़ के गांव में ‘राष्ट्रपति’ नाम वाले व्यक्ति का मामला पहुंचा राष्ट्रपति भवन! अब केंद्र सरकार के सामने उठी बड़ा कानून बनाने की मांग

 

मनेंद्रगढ़, छत्तीसगढ़। छत्तीसगढ़ के मनेंद्रगढ़ विकासखंड के ग्राम घुटरा में ‘राष्ट्रपति’ नाम वाले एक व्यक्ति का मामला अब राष्ट्रपति भवन तक पहुंच गया है। इस मामले को लेकर ब्लॉक कांग्रेस कमेटी मनेंद्रगढ़ शहर के अध्यक्ष सौरव मिश्रा ने संवैधानिक पदों और राष्ट्रीय गरिमा से जुड़े शब्दों को व्यक्तिगत नाम के रूप में इस्तेमाल करने के संबंध में स्पष्ट कानून बनाने की मांग उठाई है। उनकी याचिका पर राष्ट्रपति सचिवालय ने 17 सितंबर 2026 को संबंधित केंद्रीय विभागों को पत्र भेजा है। अब इस मामले में केंद्र सरकार के स्तर पर आगे क्या कदम उठाए जाते हैं, इस पर नजर रहेगी।

आखिर क्या है पूरा मामला?

मामला मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले के ग्राम घुटरा के एक व्यक्ति से जुड़ा है, जिसका नाम ‘राष्ट्रपति’ बताया गया है। सौरव मिश्रा की याचिका के अनुसार, संबंधित व्यक्ति को अपने नाम के कारण बैंकिंग कार्यों, सरकारी दस्तावेजों और प्रशासनिक प्रक्रियाओं के दौरान भ्रम और कठिनाइयों का सामना करना पड़ा है।

इसी प्रकरण को आधार बनाकर सौरव मिश्रा ने केंद्र सरकार के सामने एक व्यापक नीतिगत मुद्दा उठाया है। उनका कहना है कि ‘राष्ट्रपति’, ‘प्रधानमंत्री’, ‘मुख्यमंत्री’, ‘राज्यपाल’ और ‘भारत’ जैसे शब्दों के व्यक्तिगत नाम के रूप में इस्तेमाल को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश होने चाहिए, ताकि किसी नागरिक को भविष्य में ऐसी परेशानियों से न गुजरना पड़े।

राष्ट्रपति सचिवालय ने 17 सितंबर को भेजा पत्र

सौरव मिश्रा के अनुसार, उन्होंने इस विषय पर राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को अलग-अलग पत्र भेजकर आवश्यक पहल करने का अनुरोध किया था।

इस मामले में राष्ट्रपति सचिवालय से प्राप्त पत्र के मुताबिक, याचिका क्रमांक P1/B/202609162221 के तहत 17 सितंबर 2026 को याचिका को भारत सरकार के गृह मंत्रालय के गृह सचिव और विधि एवं न्याय विभाग के संयुक्त सचिव के ध्यानार्थ भेजा गया।

पत्र में कहा गया है कि 8 अगस्त 2026 को राष्ट्रपति को संबोधित याचिका संबंधित अधिकारियों को उचित ध्यान देने के लिए भेजी गई है। साथ ही, याचिका पर की गई कार्रवाई की जानकारी सीधे याचिकाकर्ता को देने का भी उल्लेख है।

हालांकि, संबंधित विभागों की ओर से इस मांग पर अंतिम निर्णय या किसी नए कानून की घोषणा की जानकारी अभी इस विज्ञप्ति में नहीं दी गई है।

प्रधानमंत्री कार्यालय में भी कार्रवाई का दावा

सौरव मिश्रा ने बताया कि उन्होंने इस मुद्दे को प्रधानमंत्री कार्यालय के समक्ष भी रखा है। उनके मुताबिक, वहां भी मामले में कार्रवाई की प्रक्रिया जारी है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी मांग किसी व्यक्ति विशेष को निशाना बनाने के लिए नहीं है। उनका उद्देश्य ग्राम घुटरा के इस मामले के जरिए उन प्रशासनिक समस्याओं की ओर ध्यान दिलाना है, जो किसी संवैधानिक पद या राष्ट्रीय पहचान से जुड़े शब्द को व्यक्तिगत नाम के रूप में इस्तेमाल करने से उत्पन्न हो सकती हैं।

केंद्र सरकार से कानून बनाने की मांग

सौरव मिश्रा ने केंद्र सरकार से मौजूदा कानूनी व्यवस्था की समीक्षा करने और जरूरत पड़ने पर इस विषय पर स्पष्ट कानून या नीति बनाने की मांग की है। उन्होंने सुझाव दिया कि इस संबंध में विशेषज्ञों से विचार-विमर्श कर ऐसा प्रावधान तैयार किया जाए, जिससे नामों के कारण बैंकिंग, सरकारी अभिलेखों और प्रशासनिक कामकाज में अनावश्यक भ्रम की स्थिति न बने।

हालांकि, इस तरह के किसी कानून पर विचार करते समय नागरिकों के व्यक्तिगत अधिकारों और नाम रखने की स्वतंत्रता को भी ध्यान में रखना होगा। प्रस्तावित व्यवस्था में संवैधानिक पदों की गरिमा और नागरिकों के अधिकारों के बीच संतुलन बनाए रखने की जरूरत होगी।

अब संबंधित विभागों के फैसले पर नजर

सौरव मिश्रा ने उम्मीद जताई है कि गृह मंत्रालय और विधि एवं न्याय विभाग इस विषय पर गंभीरता से विचार करेंगे और जनहित में उचित कदम उठाएंगे।

फिलहाल, राष्ट्रपति सचिवालय की ओर से याचिका संबंधित विभागों तक भेजे जाने की जानकारी सामने आई है। अब यह देखना होगा कि केंद्र सरकार इस मांग पर क्या रुख अपनाती है और क्या संवैधानिक पदों तथा राष्ट्रीय गरिमा से जुड़े शब्दों के इस्तेमाल को लेकर किसी स्पष्ट नीति या कानूनी प्रावधान पर विचार किया जाता है।

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