छत्तीसगढ़ में लगातार हुई भारी बारिश ने कई जिलों में जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। बस्तर क्षेत्र समेत राज्य के कई हिस्सों में बारिश के बाद बाढ़ जैसे हालात बने हुए हैं। हालात का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि केके रूट पर मल्लीगुड़ा और छत्रीपुट रेलवे स्टेशन के बीच लैंडस्लाइड के कारण करीब 150 मीटर हिस्से की मिट्टी बह गई, जिसके बाद रेलवे ट्रैक हवा में झूलता नजर आया। ट्रैक पर भारी मात्रा में मलबा भी जमा हो गया है।
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, घटना की जानकारी मिलते ही टीम मौके पर पहुंची और स्थिति का जायजा लिया। ट्रैक से मलबा हटाने का काम तेजी से किया जा रहा है। सुरक्षा को देखते हुए इस रूट पर चलने वाली सभी पैसेंजर और मालगाड़ियों को रद्द कर दिया गया है। रेलवे की टीम ट्रैक को सुरक्षित बनाने और यातायात बहाल करने के प्रयास में जुटी हुई है।
बाढ़ ने हजारों परिवारों को किया प्रभावित
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण करने और राहत शिविरों में रह रहे लोगों से मुलाकात करने के बाद बताया कि पिछले सप्ताह लगातार तीन से चार दिनों तक हुई भारी बारिश से राज्य के कई हिस्से प्रभावित हुए हैं। खासकर बस्तर क्षेत्र में बारिश के कारण बाढ़ की स्थिति गंभीर हुई।
मुख्यमंत्री के मुताबिक, बाढ़ से 571 गांवों के करीब 22,377 लोग प्रभावित हुए हैं। इनमें से लगभग 16 हजार लोगों को रेस्क्यू कर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। प्रभावित लोगों के लिए 173 राहत शिविर बनाए गए हैं, जहां उनके रहने और खाने-पीने की व्यवस्था की जा रही है।
आठ लोगों की मौत, 172 मवेशियों ने भी गंवाई जान
भारी बारिश और बाढ़ से जुड़ी घटनाओं में अब तक आठ लोगों की मौत होने की जानकारी सामने आई है। इसके अलावा 172 मवेशियों की भी जान गई है। प्रशासन की ओर से प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव अभियान चलाया जा रहा है।
हालात को देखते हुए बाढ़ में फंसे लोगों को निकालने के लिए हेलीकॉप्टरों की भी मदद ली गई। दुर्गम इलाकों में फंसे लोगों तक राहत पहुंचाने और उन्हें सुरक्षित स्थानों पर ले जाने के लिए प्रशासन की टीमें लगातार काम कर रही हैं।
199 मकान पूरी तरह तबाह, 11 हजार को आंशिक नुकसान
बारिश और बाढ़ के कारण बड़ी संख्या में मकानों को नुकसान पहुंचा है। शुरुआती आकलन के मुताबिक 199 मकान पूरी तरह क्षतिग्रस्त हुए हैं, जबकि करीब 11 हजार मकानों को आंशिक नुकसान पहुंचा है। प्रशासन की ओर से नुकसान का सर्वेक्षण कराया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पूरी तरह क्षतिग्रस्त मकानों के लिए सरकार की ओर से 1.20 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाएगा। जिन मकानों को आंशिक नुकसान हुआ है, उनके प्रभावित परिवारों को भी राजस्व पुस्तक परिपत्र के प्रावधानों के तहत मुआवजा दिया जाएगा।
पानी उतरने के बाद फसलों के नुकसान का होगा आकलन
बाढ़ का पानी कम होने के बाद कृषि विभाग की टीमों द्वारा फसलों को हुए नुकसान का सर्वेक्षण किया जाएगा। मुख्यमंत्री के अनुसार, अभी प्राथमिकता प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने और राहत मुहैया कराने की है। इसके बाद फसल और अन्य संपत्तियों को हुए नुकसान का विस्तृत आकलन किया जाएगा।
इधर, रेलवे ट्रैक के क्षतिग्रस्त होने से यातायात पर भी असर पड़ा है। मल्लीगुड़ा और छत्रीपुट के बीच ट्रैक के नीचे की मिट्टी बह जाने के बाद रेलवे के सामने इसे दोबारा सुरक्षित तरीके से बहाल करने की चुनौती है। फिलहाल मलबा हटाने और ट्रैक की स्थिति सुधारने का काम जारी है।
