नशीले इंजेक्शन की सप्लाई का खेल पड़ा भारी! सूरज यादव को 12 साल का सश्रम कारावास, 1 लाख का जुर्माना… बैग से मिले थे 178 इंजेक्शन

 

अंबिकापुर। नशीले इंजेक्शन की कथित सप्लाई के मामले में अंबिकापुर की विशेष नार्कोटिक्स अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। विशेष न्यायाधीश अतुल कुमार श्रीवास्तव ने दर्रीपारा निवासी सूरज यादव को नशीला इंजेक्शन रखने के मामले में 12 वर्ष के सश्रम कारावास और 1 लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है।

जुर्माना जमा नहीं करने पर आरोपी को 6 महीने का अतिरिक्त सश्रम कारावास भुगतना होगा।

मेडिकल कॉलेज के पास घेराबंदी कर पकड़ा गया था

अभियोजन के मुताबिक घटना 29 सितंबर 2025 की रात की है। सहायक जिला आबकारी अधिकारी रंजीत गुप्ता को मुखबिर से सूचना मिली थी कि सूरज यादव टीवीएस बाइक क्रमांक CG 15 CH 0906 से हर्राटिकरा पुलिया, मेडिकल कॉलेज के पास बड़ी मात्रा में इंजेक्शन की सप्लाई करने पहुंचने वाला है।

सूचना के आधार पर उड़नदस्ता टीम ने मेडिकल कॉलेज के पास हर्राटिकरा पुलिया क्षेत्र में घेराबंदी की और सूरज यादव को पकड़ लिया।

पिट्ठू बैग की तलाशी में मिले 178 इंजेक्शन

अभियोजन के अनुसार आरोपी के पीठ पर टंगे पिट्ठू बैग की तलाशी लेने पर उसमें 99 नग REXOGESIC इंजेक्शन और 79 नग AVIL इंजेक्शन, कुल 178 इंजेक्शन बरामद किए गए।

इसके बाद आरोपी के खिलाफ NDPS Act की धारा 22(C) के तहत कार्रवाई की गई। उसे गिरफ्तार कर 30 सितंबर 2025 को न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया था।

करीब एक साल बाद आया फैसला

मामले की सुनवाई के दौरान आरोपी को 10 सितंबर 2026 तक जमानत नहीं मिली थी। अब विशेष न्यायाधीश नार्कोटिक्स अंबिकापुर ने मामले में फैसला सुनाते हुए 12 वर्ष के सश्रम कारावास और एक लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है।

आरोपी की ओर से अधिवक्ता संजय अम्बष्ट ने पैरवी की, जबकि अभियोजन पक्ष की ओर से विशेष लोक अभियोजक नरेन्द्र पाण्डे ने पक्ष रखा।

‘नशे के सौदागरों को मिलेगी सीख’

सहायक जिला आबकारी अधिकारी रंजीत गुप्ता ने कहा कि किसी व्यक्ति को सजा मिलने पर उन्हें खुशी नहीं होती, क्योंकि आरोपी का भी परिवार होता है। लेकिन नशीले पदार्थों की सप्लाई करने वालों के खिलाफ ऐसी सजा से डर पैदा होगा और दूसरों को भी गलत काम से दूर रहने की सीख मिलेगी।

उन्होंने कहा कि NDPS Act के तहत नशीले पदार्थों से जुड़े अपराधों को लेकर लोगों को लगातार जागरूक किए जाने की जरूरत है। अदालत के इस फैसले को नशे के कारोबार के खिलाफ कार्रवाई के तौर पर देखा जा रहा है।