सरकारी स्कूलों में ऐसा बदलाव कि बच्चे खुद लेने लगे दाखिला! 23 विद्यार्थी पहुंचे नवोदय-एकलव्य, 150 स्कूलों में स्मार्ट TV… तीन शिक्षकों की पहल बनी मिसाल

 

धमतरी। सरकारी स्कूलों को बेहतर बनाने के लिए हमेशा बड़े बजट या महंगे संसाधनों की जरूरत नहीं होती। अगर शिक्षक के भीतर बदलाव की सोच और बच्चों के भविष्य के लिए समर्पण हो, तो सीमित संसाधनों में भी बड़ा परिवर्तन किया जा सकता है। धमतरी जिले के तीन शिक्षकों ने अपने नवाचार और मेहनत से इसकी मिसाल पेश की है।

शासकीय प्राथमिक शाला धौराभाठा के शिक्षक लीलाराम साहू, शासकीय माध्यमिक शाला लुगे की शिक्षिका रंजीता साहू और शासकीय प्राथमिक शाला कोलियारी की शिक्षिका प्रीति शांडिल्य ने शिक्षा के क्षेत्र में ऐसे प्रयास किए, जिनका असर स्कूलों से निकलकर बड़ी संख्या में विद्यार्थियों तक पहुंचा।

खेल-खेल में पढ़ाई और 23 बच्चों का नवोदय-एकलव्य में चयन

धौराभाठा के शिक्षक लीलाराम साहू ने पढ़ाई को बच्चों के लिए बोझ के बजाय रोचक अनुभव बनाने पर जोर दिया। उन्होंने खेल-खेल में शिक्षा और टीएलएम आधारित शिक्षण पद्धति को अपनाया।

इन प्रयासों से विद्यार्थियों में पढ़ाई के प्रति रुचि बढ़ी और स्कूल की छात्र संख्या में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई। उनके मार्गदर्शन में पढ़ने वाले 23 विद्यार्थियों का चयन जवाहर नवोदय विद्यालय और एकलव्य विद्यालय के लिए हो चुका है।

‘पढ़ई तुहर दुआर’ और टीएलएम आधारित शिक्षण के क्षेत्र में उनके कार्य को राज्य स्तर पर भी पहचान मिली है। शिक्षा के क्षेत्र में योगदान को देखते हुए उनका चयन राज्यपाल पुरस्कार के लिए किया गया है।

‘मैं हूं गुल्लक’ से 150 स्कूलों में पहुंची डिजिटल पढ़ाई

शासकीय माध्यमिक शाला लुगे की शिक्षिका रंजीता साहू ने अपने स्कूल को डिजिटल संसाधनों से जोड़ने का संकल्प लिया। संसाधनों की कमी को बाधा मानने के बजाय उन्होंने ‘मैं हूं गुल्लक’ अभियान की शुरुआत की।

शिक्षकों और पालकों की सहभागिता से इस पहल को विस्तार मिला और जिले के 150 विद्यालयों में स्मार्ट टीवी उपलब्ध कराने का प्रयास किया गया। इसके अलावा करीब 300 विद्यालयों में गणित वर्णमाला पहुंचाने और लगभग 11 हजार बच्चों को पेन, कॉपी और किताबें उपलब्ध कराने में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही।

तकनीक और जनभागीदारी के इस अभिनव प्रयोग के लिए रंजीता साहू का चयन भी राज्यपाल पुरस्कार के लिए किया गया है।

दृष्टिबाधित बच्चों के लिए 11 हजार से ज्यादा ऑडियो बुक्स

शासकीय प्राथमिक शाला कोलियारी की शिक्षिका प्रीति शांडिल्य ने समावेशी शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय काम किया है। राष्ट्रपति पुरस्कृत शिक्षिका के. शारदा के नेतृत्व में राज्य के 30 शिक्षकों की टीम के साथ उन्होंने दृष्टिबाधित विद्यार्थियों के लिए ब्रेल और ऑडियो आधारित शैक्षणिक सामग्री तैयार करने में योगदान दिया।

इस पहल के तहत कक्षा 5वीं से 12वीं तक के दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए 11 हजार से अधिक ऑडियो बुक्स तैयार की गईं। यह सामग्री 400 से अधिक स्कूलों और 20 दृष्टिबाधित विशेष विद्यालयों तक पहुंचाई गई है।

शैक्षणिक सामग्री को लाखों बार देखा-सुना जा चुका है और इस कार्य का नाम गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी दर्ज हुआ है।

कलेक्टर ने किया शिक्षकों का सम्मान

इन शिक्षकों की उपलब्धियों को जिले के लिए गौरवपूर्ण बताते हुए कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में लीलाराम साहू और रंजीता साहू को शाल-श्रीफल और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। उन्होंने दोनों शिक्षकों को राज्यपाल पुरस्कार के लिए चयनित होने पर बधाई दी।

इस दौरान जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी जयंत नाहटा सहित अन्य जिला अधिकारी मौजूद रहे।

कलेक्टर ने कहा कि धमतरी के शिक्षकों ने यह साबित किया है कि शिक्षा में बदलाव केवल संसाधनों से नहीं, बल्कि दृष्टिकोण, समर्पण और नवाचार से आता है। सरकारी विद्यालयों को बच्चों और पालकों की पहली पसंद बनाने में ऐसे प्रयास महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

जब शिक्षक ने नौकरी को मिशन बना लिया

धमतरी के इन तीन शिक्षकों की कहानी सिर्फ पुरस्कार और सम्मान तक सीमित नहीं है। यह इस बात की मिसाल है कि जब शिक्षक अपने दायित्व को नौकरी से आगे बढ़ाकर मिशन बना लेता है, तो उसका असर सैकड़ों-हजारों बच्चों के भविष्य तक पहुंच सकता है।

कहीं खेल-खेल में पढ़ाई से बच्चे नवोदय और एकलव्य विद्यालय तक पहुंच रहे हैं, तो कहीं डिजिटल संसाधनों से सरकारी स्कूलों में पढ़ाई का तरीका बदल रहा है। वहीं दृष्टिबाधित बच्चों के लिए तैयार ऑडियो बुक्स यह संदेश देती हैं कि अच्छी शिक्षा का अधिकार हर बच्चे तक पहुंचना चाहिए।