[स्थान]। वसुंधरा बिल्डर्स के निर्माणाधीन मॉल साइट पर काम करने के दौरान बिजली का करंट लगने से मजदूर अशोक कुमार सिंह की दर्दनाक मौत हो गई। घटना के बाद निर्माण स्थल पर सुरक्षा व्यवस्था और मजदूरों के श्रम विभाग में पंजीयन को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
असंगठित कामगार एवं कर्मचारी कांग्रेस ने इस घटना को बिल्डर प्रबंधन की कथित लापरवाही और प्रशासन की अनदेखी का परिणाम बताते हुए मामले में कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
6 साल से साइट पर काम कर रहा था मजदूर
संगठन के मुताबिक, मृतक अशोक कुमार सिंह पिछले करीब 6 वर्षों से इसी निर्माणाधीन साइट पर मजदूरी कर रहा था। आरोप है कि इतने लंबे समय तक काम करने के बावजूद उसे पर्याप्त सुरक्षा उपकरण उपलब्ध नहीं कराए गए।
संगठन ने दावा किया है कि साइट पर हेलमेट, सेफ्टी बेल्ट और ग्लव्स जैसे सुरक्षा उपकरणों की व्यवस्था नहीं थी और खुले बिजली के तारों के बीच मजदूरों से काम कराया जा रहा था।
हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। घटना की वास्तविक परिस्थितियों और सुरक्षा मानकों की जांच के बाद ही जिम्मेदारी स्पष्ट हो सकेगी।
श्रम विभाग में पंजीयन नहीं होने का दावा
इस मामले में सबसे बड़ा सवाल मृतक के कथित श्रमिक पंजीयन को लेकर उठाया गया है। संगठन का दावा है कि अशोक कुमार सिंह के छह साल तक साइट पर काम करने के बावजूद श्रम विभाग में उसका पंजीयन नहीं कराया गया था।
संगठन ने यह भी आरोप लगाया है कि उसका नाम ESI, PF या श्रमिक कल्याण बोर्ड से संबंधित रिकॉर्ड में दर्ज नहीं था। यदि यह जानकारी जांच में सही पाई जाती है तो निर्माण स्थलों पर श्रमिकों के पंजीयन और निगरानी व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो सकते हैं।
पीड़ित परिवार से मिलने पहुंची संगठन की टीम
घटना की जानकारी मिलने के बाद असंगठित कामगार एवं कर्मचारी कांग्रेस की टीम पीड़ित परिवार से मिलने पहुंची। संगठन के प्रदेश अध्यक्ष अभिषेक बोरकर के निर्देश पर प्रदेश महासचिव तपन सिकदार के नेतृत्व में टीम ने परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की।
तपन सिकदार ने कहा कि संगठन इस मामले को गंभीरता से ले रहा है और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए हरसंभव प्रयास किया जाएगा।
उन्होंने सवाल उठाया कि अगर कोई मजदूर वर्षों तक बिना पंजीयन के काम करता रहा, तो संबंधित विभागों की निगरानी व्यवस्था पर भी जवाबदेही तय होनी चाहिए।
संगठन ने रखीं पांच प्रमुख मांगें
असंगठित कामगार एवं कर्मचारी कांग्रेस ने प्रशासन और बिल्डर प्रबंधन के सामने कई मांगें रखी हैं। संगठन की प्रमुख मांगें हैं—
- मृतक के परिवार को वसुंधरा बिल्डर्स की ओर से 25 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए।
- घटना की जांच कर लापरवाही पाए जाने पर बिल्डर के खिलाफ FIR दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जाए।
- निर्माणाधीन मॉल साइट की सुरक्षा व्यवस्था की उच्चस्तरीय जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाए।
- मृतक के परिवार के एक सदस्य को स्थायी रोजगार और पात्रता के अनुसार श्रम विभाग की योजनाओं का लाभ दिया जाए।
- जिले के सभी निर्माण स्थलों पर काम कर रहे असंगठित मजदूरों का अनिवार्य श्रमिक पंजीयन सुनिश्चित किया जाए।
न्याय नहीं मिला तो आंदोलन की चेतावनी
संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन और बिल्डर प्रबंधन की ओर से जल्द उचित कार्रवाई नहीं की गई और पीड़ित परिवार को न्याय नहीं मिला, तो संगठन सड़क पर उतरकर आंदोलन करेगा।
फिलहाल इस घटना ने निर्माण स्थलों पर मजदूरों की सुरक्षा, सुरक्षा उपकरणों की उपलब्धता और श्रमिकों के अनिवार्य पंजीयन को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि प्रशासन घटना की जांच में क्या सामने लाता है और जिम्मेदारी तय करने को लेकर क्या कदम उठाए जाते हैं।
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