जशपुर की कहानी अब किताब में दर्ज, CM साय ने किया ‘जशपुर : एक परिचय’ का विमोचन; विकास से लेकर संस्कृति और प्रकृति तक का पूरा दस्तावेज

रायपुर: छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले की प्राकृतिक खूबसूरती, जनजातीय संस्कृति, प्रशासनिक बदलाव और विकास की पूरी यात्रा अब एक पुस्तक के रूप में दस्तावेज बन गई है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सोमवार को रायपुर में भारतीय लोक प्रशासन संस्थान, नई दिल्ली की ओर से प्रकाशित पुस्तक ‘जशपुर : एक परिचय’ का विमोचन किया।

यह पुस्तक जशपुर के इतिहास, प्रशासनिक विकास, सुशासन, सामाजिक-आर्थिक बदलाव, जनजातीय संस्कृति, प्राकृतिक संपदा और भविष्य की विकास संभावनाओं पर आधारित व्यापक अध्ययन है। इसमें आजादी के बाद से जिले की प्रशासनिक व्यवस्था में आए बदलावों से लेकर वर्तमान प्रशासनिक संस्थाओं और उनकी कार्यप्रणाली तक का अध्ययन किया गया है।

CM साय बोले- जशपुर की पहचान देश-दुनिया तक पहुंचाने में मददगार होगी पुस्तक

पुस्तक के विमोचन के दौरान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने भारतीय लोक प्रशासन संस्थान की छत्तीसगढ़ क्षेत्रीय शाखा को इस महत्वपूर्ण प्रकाशन के लिए बधाई दी।

उन्होंने कहा कि जशपुर छत्तीसगढ़ के उन खास अंचलों में शामिल है, जहां प्रकृति, संस्कृति और परंपराओं की समृद्ध विरासत के साथ विकास की अपार संभावनाएं मौजूद हैं। जिले की पहचान सुंदर पहाड़ों, घाटियों, नदियों, जलप्रपातों और घने वनों के साथ-साथ समृद्ध जनजातीय संस्कृति और परंपराओं से भी है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जशपुर की इन विशेषताओं के साथ उसकी विकास यात्रा और प्रशासनिक अनुभवों को एक पुस्तक में समेटना सराहनीय प्रयास है। इससे जशपुर की विशिष्ट पहचान और संभावनाओं को देश-दुनिया के सामने लाने में मदद मिलेगी।

सिर्फ इतिहास नहीं, विकास की पूरी तस्वीर दिखाती है किताब

मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी क्षेत्र की विकास यात्रा को समझने के लिए उसके इतिहास, समाज, संस्कृति, प्राकृतिक संसाधनों और प्रशासनिक व्यवस्था का समग्र अध्ययन जरूरी है। ‘जशपुर : एक परिचय’ इसी दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण दस्तावेज है।

पुस्तक में केवल जशपुर की वर्तमान स्थिति को ही दर्ज नहीं किया गया है, बल्कि समय के साथ जिले की प्रशासनिक संरचना और विकास प्रक्रिया में आए बदलावों को भी समझने का प्रयास किया गया है।

प्रकृति और विकास के बीच संतुलन पर जोर

विष्णुदेव साय ने कहा कि जशपुर का सांस्कृतिक और पारिस्थितिक स्वरूप छत्तीसगढ़ के मैदानी और औद्योगिक क्षेत्रों से अलग है। छोटानागपुर पठार के विस्तारित भू-भाग का हिस्सा होने के कारण यहां की भौगोलिक संरचना, जलवायु, वन संपदा और आजीविका का स्वरूप भी विशिष्ट है।

उन्होंने कहा कि यहां पीढ़ियों से रहने वाले जनजातीय समुदायों ने अपनी परंपराओं और प्रकृति के साथ सह-अस्तित्व की संस्कृति को संरक्षित रखा है। यही वजह है कि जशपुर अध्ययन और विकास दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जिले में विकास के साथ प्राकृतिक संपदा और स्थानीय संस्कृति का संरक्षण भी जरूरी है। कृषि, वनोपज, पर्यटन, स्थानीय उत्पादों तथा महिला और युवा उद्यमिता को बढ़ावा देकर जशपुर की अर्थव्यवस्था को और मजबूत किया जा सकता है।

पर्यटन के क्षेत्र में भी जशपुर की बड़ी संभावनाएं

मुख्यमंत्री ने जशपुर को प्राकृतिक पर्यटन की दृष्टि से छत्तीसगढ़ के सबसे समृद्ध क्षेत्रों में से एक बताया। यहां के पहाड़, जंगल, नदियां, जलप्रपात और खूबसूरत घाटियां पर्यटकों को आकर्षित करने की क्षमता रखती हैं।

इसके अलावा जनजातीय जीवन, लोक संस्कृति, पारंपरिक कला और स्थानीय खान-पान भी जशपुर को एक खास पर्यटन गंतव्य बना सकते हैं।

उन्होंने कहा कि जिले की इन खूबियों का व्यवस्थित दस्तावेजीकरण जशपुर को व्यापक पहचान दिलाने में भी मदद करेगा।

आजादी के बाद से अब तक की प्रशासनिक यात्रा दर्ज

भारतीय लोक प्रशासन संस्थान की ओर से इस अध्ययन का उद्देश्य आजादी के बाद जिलों की प्रशासनिक व्यवस्था, शासन प्रणाली और कार्यप्रणाली में आए बदलावों के साथ उनकी विकास यात्रा को दस्तावेज के रूप में सामने लाना है।

इसी अभियान के तहत संस्थान की छत्तीसगढ़ क्षेत्रीय शाखा को राज्य के किसी जिले का व्यापक अध्ययन करने का प्रोजेक्ट दिया गया था। प्रदेश के 33 जिलों में से जशपुर का चयन किया गया।

जशपुर को चुनने के पीछे उसकी भौगोलिक, सामाजिक और सांस्कृतिक विशिष्टताओं को प्रमुख कारण माना गया। यह छत्तीसगढ़ के उत्तर-पूर्वी हिस्से में स्थित प्रमुख जनजातीय बहुल जिला है।

1998 में बना था अलग जिला

अध्ययन में जशपुर के प्रशासनिक इतिहास को भी शामिल किया गया है। पुस्तक के अनुसार, 1998 में अलग जिला बनने से पहले जशपुर रायगढ़ जिले की एक तहसील था।

जशपुर का अलग जिला गजेटियर उपलब्ध नहीं होने के कारण अध्ययन के लिए रायगढ़ जिला गजेटियर के साथ केंद्र और राज्य सरकार के विभिन्न प्रकाशनों, जनगणना 2011, सरकारी विभागों की रिपोर्ट और जिले से संबंधित प्रकाशित सामग्री का इस्तेमाल किया गया है।

एक व्यक्ति नहीं, कई विभागों के सहयोग से तैयार हुआ अध्ययन

‘जशपुर : एक परिचय’ की खास बात यह है कि इसे किसी एक व्यक्ति के प्रयास से तैयार नहीं किया गया है। जशपुर जिला प्रशासन के विभिन्न विभागों से मिली जानकारी और सामूहिक सहयोग के आधार पर पुस्तक को तैयार किया गया है।

विभिन्न सरकारी कार्यालयों से उपलब्ध आंकड़ों और सूचनाओं को संकलित कर जिले की प्रशासन, समाज, अर्थव्यवस्था, संस्कृति, प्राकृतिक संपदा और विकास की समग्र तस्वीर सामने रखने की कोशिश की गई है।

आगे के शोध के लिए भी बनेगी आधार

भारतीय लोक प्रशासन संस्थान की छत्तीसगढ़ क्षेत्रीय शाखा का मानना है कि यह अध्ययन जशपुर के विभिन्न पहलुओं पर आगे होने वाले विस्तृत शोध के लिए आधार का काम कर सकता है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने विश्वास जताया कि ‘जशपुर : एक परिचय’ प्रशासकों, नीति-निर्माताओं, शोधार्थियों और विद्यार्थियों के लिए महत्वपूर्ण संदर्भ ग्रंथ साबित होगी। साथ ही यह पुस्तक जशपुर के अतीत और वर्तमान को समझने के साथ जिले के भविष्य के विकास की संभावनाओं को नई दिशा देने में भी उपयोगी साबित होगी।

विमोचन के दौरान ये लोग रहे मौजूद

पुस्तक विमोचन के अवसर पर भारतीय लोक प्रशासन संस्थान की छत्तीसगढ़ क्षेत्रीय शाखा रायपुर के चेयरमैन और पूर्व मुख्य सचिव सुयोग्य कुमार मिश्रा, वाइस चेयरमैन एवं पूर्व अपर मुख्य सचिव डॉ. इंदिरा मिश्रा तथा वाइस चेयरमैन, पूर्व मुख्य सचिव और वर्तमान छत्तीसगढ़ राज्य निर्वाचन आयुक्त अजय सिंह सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।