रेवंत रेड्डी को नहीं मिली विदेश यात्रा की मंजूरी, पहले भी कई CM को MEA ने रोका; ममता से केजरीवाल तक की पूरी लिस्ट

 

हैदराबाद: तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी आधिकारिक विदेश यात्रा के लिए विदेश मंत्रालय (MEA) से राजनीतिक मंजूरी नहीं मिलने वाले नेताओं की सूची में शामिल हो गए हैं। बताया जा रहा है कि तेलंगाना के गठन के बाद और संयुक्त आंध्र प्रदेश के दौर को मिलाकर वह ऐसे पहले मुख्यमंत्री हैं, जिन्हें विदेश यात्रा के लिए राजनीतिक मंजूरी नहीं मिली।

हालांकि, रेवंत रेड्डी देश के पहले ऐसे मुख्यमंत्री या नेता नहीं हैं, जिन्हें विदेश यात्रा की अनुमति नहीं मिली हो। इससे पहले भी कई विपक्षी नेताओं को मुख्यमंत्री या मंत्री रहते हुए विदेश यात्रा के लिए MEA की मंजूरी नहीं मिली है। इनमें ममता बनर्जी, अरविंद केजरीवाल, भगवंत मान और पिनाराई विजयन जैसे नाम शामिल हैं।

भगवंत मान को दो बार नहीं मिली विदेश यात्रा की मंजूरी

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान को भी विदेश यात्रा के लिए राजनीतिक मंजूरी नहीं मिलने का सामना करना पड़ा है।

रिपोर्ट के मुताबिक, फरवरी 2026 में मान को पंजाब के उद्योग मंत्री समेत 25 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल के साथ यूके और इजरायल जाना था। यात्रा का उद्देश्य निवेश आकर्षित करना था, लेकिन इसके लिए राजनीतिक मंजूरी नहीं दी गई।

इससे पहले अगस्त 2024 में भी MEA ने उन्हें पेरिस ओलंपिक में भारतीय हॉकी टीम का समर्थन करने के लिए 3 से 9 अगस्त तक फ्रांस जाने की अनुमति नहीं दी थी। हालांकि, दिसंबर 2025 में पंजाब के मुख्यमंत्री को जापान और दक्षिण कोरिया की यात्रा के लिए मंजूरी मिल गई थी।

ममता बनर्जी को रोम और शिकागो जाने से रोका गया

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को भी विदेश यात्रा के लिए राजनीतिक मंजूरी नहीं मिली थी। सितंबर 2021 में वह रोम में आयोजित विश्व शांति सम्मेलन में शामिल होना चाहती थीं, लेकिन MEA ने उन्हें मंजूरी नहीं दी।

विदेश मंत्रालय की ओर से उस समय कहा गया था कि कार्यक्रम मुख्यमंत्री स्तर का नहीं था। मंजूरी नहीं मिलने के बाद ममता बनर्जी और उनकी पार्टी के नेताओं ने सोशल मीडिया पर नाराजगी जाहिर की थी।

इससे पहले 2018 में भी ममता बनर्जी की शिकागो यात्रा को मंजूरी नहीं मिली थी।

केजरीवाल और सिसोदिया को भी मिली थी रोक

दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल भी ऐसी रोक का सामना कर चुके हैं। अक्टूबर 2019 में उन्हें डेनमार्क के कोपेनहेगन में होने वाले C40 जलवायु शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने जाना था, लेकिन MEA से राजनीतिक मंजूरी नहीं मिली।

वहीं, नवंबर 2018 में दिल्ली के तत्कालीन उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को ऑस्ट्रिया की यात्रा के लिए अनुमति नहीं दी गई थी।

पिनाराई विजयन को भी नहीं मिली थी मंजूरी

केरल के तत्कालीन मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन को नवंबर 2025 में सऊदी अरब, बहरीन और ओमान की यात्रा के लिए राजनीतिक मंजूरी नहीं मिली थी।

इस तरह रेवंत रेड्डी से पहले भी कई विपक्षी नेताओं की विदेश यात्राएं MEA की राजनीतिक मंजूरी नहीं मिलने के कारण प्रभावित हो चुकी हैं।

क्या होती है राजनीतिक मंजूरी?

केंद्र सरकार की नीति के तहत सरकारी अधिकारियों और मुख्यमंत्रियों को आधिकारिक या निजी विदेश यात्रा के लिए विदेश मंत्रालय से राजनीतिक मंजूरी (Political Clearance) लेनी होती है। इसके अलावा यात्रा के स्वरूप के आधार पर अन्य विभागों से भी अनुमति आवश्यक हो सकती है।

MEA राजनीतिक मंजूरी देने से पहले कई पहलुओं पर विचार करता है। इनमें यात्रा का उद्देश्य, कार्यक्रम का स्तर, निमंत्रण का स्वरूप, संबंधित देश के साथ भारत के संबंध और यात्रा से जुड़े अन्य कूटनीतिक पहलू शामिल होते हैं।

यानी किसी मुख्यमंत्री को राजनीतिक मंजूरी न मिलना अपने आप में विदेश यात्रा पर सामान्य प्रतिबंध नहीं है, बल्कि यह केंद्र सरकार की निर्धारित अनुमति प्रक्रिया का हिस्सा है।