महासमुंद में मानसून का ‘जल चमत्कार’! इस तहसील ने तोड़े सारे रिकॉर्ड, बारिश के आंकड़े देखकर चौंक जाएंगे आप

महासमुंद। छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में इस बार मानसून पूरी तरह मेहरबान नजर आ रहा है। लगातार हो रही बारिश ने न सिर्फ खेतों को हरियाली से भर दिया है, बल्कि जलाशयों, तालाबों और नदियों में भी पानी का स्तर तेजी से बढ़ने लगा है। सबसे दिलचस्प बात यह है कि जिले की एक तहसील ने बारिश के मामले में ऐसा रिकॉर्ड बनाया है, जिसने सभी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।

भू-अभिलेख विभाग के अनुसार, 1 जून 2026 से शुरू हुए मानसून सीजन में अब तक जिले में 724.7 मिलीमीटर औसत वर्षा दर्ज की जा चुकी है। अच्छी बारिश से किसानों में उत्साह का माहौल है और खरीफ फसलों की बुआई के साथ फसल विकास को भी भरपूर लाभ मिल रहा है।

इस तहसील में हुई सबसे ज्यादा बारिश

जिले की तहसीलों में पिथौरा सबसे अधिक वर्षा वाला क्षेत्र बनकर उभरा है, जहां अब तक 917.3 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई है। इसके बेहद करीब सरायपाली में 914.4 मिमी वर्षा दर्ज हुई। वहीं बसना में 777.6 मिमी, बागबाहरा में 591.9 मिमी, कोमाखान में 576.3 मिमी और महासमुंद तहसील में 571.1 मिमी वर्षा दर्ज की गई, जो जिले में सबसे कम रही।

31 जुलाई को भी जारी रही बारिश

शुक्रवार 31 जुलाई 2026 को भी जिले में हल्की से मध्यम बारिश का सिलसिला जारी रहा। पूरे जिले में 4.1 मिमी औसत वर्षा दर्ज की गई।

तहसीलवार आंकड़ों के अनुसार—

  • महासमुंद – 5.9 मिमी
  • सरायपाली – 4.9 मिमी
  • बागबाहरा – 4.1 मिमी
  • बसना – 4.0 मिमी
  • पिथौरा – 3.7 मिमी
  • कोमाखान – 2.2 मिमी

खेती के लिए बेहद फायदेमंद साबित हो रही बारिश

कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि अब तक हुई वर्षा खरीफ सीजन की प्रमुख फसलों, खासकर धान, मक्का और अन्य वर्षा आधारित फसलों के लिए बेहद अनुकूल है। पर्याप्त बारिश से सिंचाई पर निर्भरता कम होगी और बेहतर उत्पादन की संभावना बढ़ेगी। इसके अलावा भूजल स्तर में सुधार, जलाशयों के भरने और पेयजल उपलब्धता पर भी सकारात्मक असर पड़ने की उम्मीद है।

प्रशासन ने जारी की अपील

जिला प्रशासन लगातार वर्षा की स्थिति पर नजर बनाए हुए है और सभी संबंधित विभागों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। लोगों से अपील की गई है कि बारिश के दौरान जलभराव वाले क्षेत्रों से बचें और मौसम विभाग व प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें।

यदि आने वाले दिनों में भी मानसून की यही रफ्तार बनी रही, तो महासमुंद जिले में कृषि उत्पादन के साथ-साथ जल संरक्षण की स्थिति भी पहले से अधिक मजबूत होने की उम्मीद है।