रायपुर/बिलासपुर। छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड (CGMSCL) को टेंडर विवाद से जुड़े मामले में सर्वोच्च न्यायालय से बड़ी अंतरिम राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के उस आदेश के प्रभाव पर फिलहाल रोक लगा दी है, जिसमें CGMSCL को याचिकाकर्ता को ₹1 लाख क्षतिपूर्ति देने और निगम की कार्यप्रणाली पर प्रतिकूल टिप्पणियां की गई थीं। मामले की अगली सुनवाई अब 10 अगस्त 2026 को होगी।
CGMSCL ने 5 फरवरी 2026 को पारित छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (SLP) दायर की थी। 7 जुलाई 2026 को हुई सुनवाई में निगम की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल अनिल कौशिक और एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड कौस्तुभ शुक्ला ने पक्ष रखा।
सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने प्रतिवादियों को नोटिस जारी करते हुए मामले की अगली सुनवाई 10 अगस्त 2026 तय की। साथ ही, अंतरिम राहत देते हुए हाईकोर्ट द्वारा ₹1 लाख क्षतिपूर्ति के भुगतान और आदेश में की गई प्रतिकूल टिप्पणियों पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी।
बताया गया कि यह विशेष अनुमति याचिका CGMSCL के अध्यक्ष दीपक म्हास्के और प्रबंध संचालक ऋतेश कुमार अग्रवाल (IAS) के मार्गदर्शन में दायर की गई थी।
क्या है पूरा मामला?
विवाद CGMSCL की एक निविदा प्रक्रिया से जुड़ा है। आरोप था कि निगम ने कम दर (Lowest Bid) देने वाले पात्र बोलीदाता के बजाय अधिक दर वाले पक्ष को ठेका प्रदान किया। इस मामले में दुर्गा मेडिकल, घेरघोड़ा (जिला रायगढ़) के संचालक नटवर लाल अग्रवाल ने अपने अधिवक्ता आशुतोष मिश्रा के माध्यम से हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।
याचिकाकर्ता ने दावा किया था कि वह ‘बी’ श्रेणी का पंजीकृत सिविल ठेकेदार है और उसकी बोली को गलत तरीके से अयोग्य घोषित कर 23 सितंबर 2025 को अनुबंध दूसरे पक्ष को दे दिया गया। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने CGMSCL की कार्यप्रणाली पर कड़ी टिप्पणी करते हुए निगम को याचिकाकर्ता को ₹1 लाख क्षतिपूर्ति देने का निर्देश दिया था।
अब सुप्रीम कोर्ट द्वारा दी गई अंतरिम राहत के बाद इस मामले पर सभी की नजरें 10 अगस्त को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं।
