बिलासपुर। साइबर ठग अब लोगों की भावनाओं को निशाना बनाकर नए-नए तरीके से ठगी को अंजाम दे रहे हैं। बिलासपुर में ऐसा ही एक मामला सामने आया है, जहां भाई को गिरफ्तारी से बचाने की जल्दबाजी में एक महिला डिजिटल अरेस्ट जैसे साइबर जाल का शिकार हो गई। ठगों ने खुद को अधिकारी बताकर महिला को इतना डरा दिया कि उसने बिना किसी पुष्टि के करीब 48 हजार रुपये उनके खाते में ट्रांसफर कर दिए।
जानकारी के अनुसार कोतवाली थाना क्षेत्र के गोंडपारा सिंधी मोहल्ला निवासी विनय ठारवानी की बहन पूनम ठारवानी के मोबाइल पर बुधवार सुबह करीब सात बजे व्हाट्सएप कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को सरकारी अधिकारी बताते हुए दावा किया कि उसका भाई विदेश से सोना लेकर लौट रहा था, जिसे दिल्ली एयरपोर्ट पर पकड़ लिया गया है।
ठगों ने महिला को बताया कि यदि तत्काल कार्रवाई नहीं की गई तो उसके भाई पर गंभीर कानूनी कार्रवाई हो सकती है। भाई को छुड़ाने के नाम पर पहले 30 हजार रुपये और फिर 18 हजार 350 रुपये ऑनलाइन जमा कराए गए। इसके बाद भी लगातार और पैसों की मांग की जाने लगी।
लगातार बढ़ती मांग और संदिग्ध बातचीत के बाद महिला को शक हुआ। उसने घबराकर अपना मोबाइल बंद कर दिया और अपने भाई विनय ठारवानी से संपर्क किया। बातचीत के दौरान पूरे मामले का खुलासा हुआ कि वह साइबर ठगी का शिकार हो चुकी है।
घटना की जानकारी मिलने के बाद विनय ठारवानी ने कोतवाली थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने अज्ञात साइबर ठगों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। साथ ही ट्रांजैक्शन और कॉल डिटेल के आधार पर आरोपियों की तलाश की जा रही है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि साइबर अपराधी अक्सर परिवार के किसी सदस्य की गिरफ्तारी, दुर्घटना या कानूनी कार्रवाई का डर दिखाकर लोगों को मानसिक दबाव में लेते हैं। ऐसे मामलों में सबसे पहले संबंधित व्यक्ति या परिवार के अन्य सदस्यों से संपर्क कर जानकारी की पुष्टि करनी चाहिए। किसी भी अज्ञात कॉल, व्हाट्सएप मैसेज या वीडियो कॉल के दबाव में आकर पैसे ट्रांसफर नहीं करना चाहिए।
पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे डिजिटल अरेस्ट, फर्जी पुलिस कार्रवाई और गिरफ्तारी के नाम पर आने वाले कॉल से सतर्क रहें। थोड़ी सी सावधानी और जागरूकता ही ऐसी साइबर ठगी से बचा सकती है।
