बस्तर। छत्तीसगढ़ के बस्तर से सोमवार को केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने बड़ा संदेश दिया। कभी नक्सल हिंसा और गोलियों की गूंज से दहले इलाकों को अब जनसेवा और विकास के केंद्र में बदला जाएगा। बस्तर दौरे के दौरान अमित शाह ने ‘शहीद वीर गुण्डाधुर सेवा डेरा’ जन सुविधा केंद्र का शुभारंभ करते हुए कई बड़े ऐलान किए।
अमित शाह ने कहा कि जिन सुरक्षा कैंपों ने वर्षों तक नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई लड़ी, अब वही कैंप आदिवासियों की सेवा और विकास के केंद्र बनेंगे।
उन्होंने कहा कि नेतानार का यह कैंप 2013 से सुरक्षा चौकी के रूप में काम कर रहा था, लेकिन अब इसे आदिवासी समाज के कल्याण के लिए जनसुविधा केंद्र में बदला जा रहा है। शाह ने कहा कि आने वाले छह महीनों में यह केंद्र स्थानीय आदिवासियों की खुशियों और गतिविधियों से गुलजार नजर आएगा।
अपने संबोधन में अमित शाह ने कहा कि “देश में आजादी बहुत पहले आ गई थी, लेकिन बस्तर में असली आजादी 31 मार्च 2026 के बाद महसूस हुई है।” उन्होंने कहा कि नक्सलवाद ने वर्षों तक इस क्षेत्र के विकास को रोककर रखा, लेकिन अब विकास की नई शुरुआत हो चुकी है।
गृहमंत्री ने आदिवासी समाज के लिए बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि सरकारी नौकरियों में 15 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित किया गया है। उन्होंने कहा कि अगर आदिवासी परिवार अपने बच्चों को पढ़ाएंगे तो उन्हें सरकारी नौकरी के साथ उद्योगों में भी रोजगार के अवसर मिलेंगे।
अमित शाह ने वन उपज और डेयरी सेक्टर को लेकर भी बड़ा प्लान साझा किया। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार मिलकर हर आदिवासी बहन को दो पशु उपलब्ध कराएंगी और गांव-गांव डेयरी मॉडल लागू किया जाएगा। इसके लिए नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड की मदद ली जाएगी।
उन्होंने कहा कि वन उपज की पैकेजिंग, ब्रांडिंग और मार्केटिंग के लिए राष्ट्रीय स्तर की कोऑपरेटिव बनाई जाएगी, जिससे आदिवासियों की आय बढ़ेगी और रोजगार के नए रास्ते खुलेंगे।
सबसे अहम घोषणा करते हुए शाह ने कहा कि बस्तर में मौजूद लगभग 196 सुरक्षा कैंपों में से 70 कैंपों को अगले डेढ़ साल के भीतर जनसेवा केंद्रों में बदला जाएगा।
इन केंद्रों में बैंकिंग सुविधा, आधार कार्ड, राशन कार्ड, सरकारी योजनाओं का लाभ और 371 सरकारी सेवाएं एक ही छत के नीचे उपलब्ध होंगी। कैंपों को आधुनिक डिजाइन देने के लिए नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइन को जिम्मेदारी दी जाएगी।
अमित शाह ने नक्सलवाद पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि नक्सलियों ने वर्षों तक विकास रोककर लोगों को गुमराह किया। स्कूल उजाड़े गए, अस्पताल बंद हुए और मासूम आदिवासियों को हिंसा में झोंका गया। अब हालात बदल रहे हैं और बस्तर विकास की नई राह पर आगे बढ़ रहा है।
उन्होंने कहा कि यह वही भूमि है जहां वीर गुंडाधुर ने विदेशी शासन के खिलाफ आदिवासियों को एकजुट किया था। अब उसी धरती से विकास और जनसेवा का नया अध्याय शुरू हो रहा है।
