किताबों से सीधे AI तक! स्कूलों में गूगल की एंट्री, बच्चों की पढ़ाई में बड़ा बदलाव या नया प्रयोग?


रायपुर। छत्तीसगढ़ में शिक्षा व्यवस्था अब एक बड़े बदलाव की दहलीज पर खड़ी नजर आ रही है। पारंपरिक पढ़ाई के साथ अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को जोड़ने की तैयारी शुरू हो गई है। स्कूल शिक्षा विभाग ने इसके लिए गूगल के साथ हाथ मिलाया है, जिससे बच्चों को नई तकनीक से जोड़ने की योजना बनाई जा रही है।

इसी कड़ी में आत्मानंद स्कूलों के प्राचार्यों के लिए एक विशेष बैठक और कार्यशाला आयोजित की जा रही है, जिसमें गूगल के विशेषज्ञ उन्हें AI आधारित शिक्षण पद्धति से अवगत कराएंगे। इसका मकसद यह है कि आने वाले समय में शिक्षक खुद तकनीक से अपडेट रहें और छात्रों को भी उसी स्तर की शिक्षा दे सकें।

स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने कहा कि अब शिक्षा का स्वरूप तेजी से बदल रहा है और छत्तीसगढ़ के बच्चों को इस बदलाव के साथ कदम मिलाकर चलना होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि आने वाले समय में बच्चों को बारहखड़ी से लेकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तक की जानकारी दी जाएगी, ताकि वे भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार रह सकें।

मंत्री ने बताया कि 15 अप्रैल से 15 जून तक शिक्षकों का विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाया जाएगा, ताकि नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत से पहले सभी आवश्यक तैयारियां पूरी हो जाएं। 16 जून से जब स्कूल खुलेंगे, तब छात्रों को आधुनिक संसाधनों के साथ पढ़ाई का अनुभव मिलेगा।

वहीं प्राइवेट स्कूलों द्वारा किताबों की कीमतों में मनमानी को लेकर भी सरकार सख्त नजर आ रही है। मंत्री ने कहा कि कई शिकायतें सामने आई हैं, जिन पर जांच जारी है और जहां भी गड़बड़ी मिलेगी, वहां तुरंत कार्रवाई की जाएगी। जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि ऐसी किसी भी शिकायत पर तुरंत संज्ञान लें।

बोर्ड परीक्षाओं की सुरक्षा को लेकर भी सरकार ने सख्ती बरतने का दावा किया है। मंत्री के अनुसार, पेपर लीक जैसी घटनाओं को रोकने के लिए इस बार कड़े इंतजाम किए गए हैं।

इसके साथ ही आने वाले शिक्षा सत्र में कई नए बदलाव भी देखने को मिलेंगे। स्कूलों में राष्ट्रगीत, राष्ट्रगान के साथ मंत्रोच्चार, महापुरुषों के जीवन पर दैनिक व्याख्यान, स्थानीय तीज-त्योहार और खेलों को शामिल किया जाएगा। योग, गार्डनिंग और हाउसकीपिंग जैसी गतिविधियां भी पाठ्यक्रम का हिस्सा बनेंगी।

अब सवाल यह है कि क्या यह नई पहल बच्चों को भविष्य के लिए तैयार करेगी या फिर यह सिर्फ एक प्रयोग बनकर रह जाएगी। फिलहाल, शिक्षा में इस बड़े बदलाव को लेकर उत्सुकता और बहस दोनों बढ़ती जा रही हैं।