रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा में आज राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा के विभागों के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 हेतु 4 हजार 808 करोड़ 73 लाख 96 हजार रुपए की अनुदान मांगें पारित कर दी गईं। इसमें भू-राजस्व एवं जिला प्रशासन, राजस्व विभागीय व्यय, पुनर्वास, प्राकृतिक आपदा राहत और उच्च शिक्षा विभाग से जुड़े विभिन्न प्रावधान शामिल हैं।
अनुदान में भू-राजस्व एवं जिला प्रशासन के लिए 2,206 करोड़ 2 लाख 97 हजार रुपए, राजस्व विभागीय व्यय के लिए 20 करोड़ 62 लाख 64 हजार रुपए, पुनर्वास के लिए 2 करोड़ 94 लाख 50 हजार रुपए, प्राकृतिक आपदाओं और सूखाग्रस्त क्षेत्रों में राहत के लिए 1,272 करोड़ 99 लाख 2 हजार रुपए तथा उच्च शिक्षा विभाग के लिए 1,306 करोड़ 14 लाख 83 हजार रुपए का प्रावधान किया गया है।
अनुदान मांगों पर चर्चा का जवाब देते हुए राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा ने कहा कि राज्य सरकार राजस्व प्रशासन को अधिक पारदर्शी, सरल और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में लगातार काम कर रही है। उन्होंने बताया कि वित्तीय वर्ष 2026-27 में राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के लिए 3,502 करोड़ रुपए का बजट प्रावधान किया गया है, ताकि नागरिकों को तेज और बेहतर सेवाएं मिल सकें।
मंत्री वर्मा ने कहा कि भूमि अभिलेखों के आधुनिकीकरण, डिजिटल सेवाओं के विस्तार और नागरिक सुविधाओं को मजबूत करने के लिए सरकार लगातार प्रयास कर रही है। डिजिटल ऋण पुस्तिका, भू-अभिलेखों का डिजिटलीकरण, ऑटो डायवर्जन और लोक सेवा गारंटी जैसी व्यवस्थाओं से राजस्व सेवाओं में पारदर्शिता और दक्षता बढ़ी है।
मंत्री ने बताया कि प्रशासनिक पुनर्गठन के बाद राज्य में राजस्व ढांचे का काफी विस्तार हुआ है। राज्य गठन के समय जहां 16 जिले थे, वहीं अब इनकी संख्या बढ़कर 33 हो गई है। इसके साथ ही राजस्व अनुविभाग, तहसील, राजस्व निरीक्षक मंडल और पटवारी हल्कों की संख्या में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जिससे प्रशासनिक कार्यों में तेजी आई है।
राज्य सरकार ने भूमि उपयोग परिवर्तन की प्रक्रिया को पूरी तरह ऑनलाइन करते हुए ऑटो डायवर्सन प्रणाली लागू की है। इसके तहत आवेदन के 15 दिनों के भीतर भूमि उपयोग परिवर्तन स्वतः हो जाता है।
इसके साथ ही डिजिटल किसान किताब की सुविधा भी शुरू की गई है, जिससे किसानों को भूमि स्वामित्व, ऋण स्थिति और अन्य जानकारी ऑनलाइन मिल रही है। इससे किसानों को फसल ऋण लेने में भी सुविधा हो रही है।
मंत्री वर्मा ने बताया कि दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना के तहत भूमिहीन खेतिहर मजदूरों और पारंपरिक ग्रामीण व्यवसाय से जुड़े परिवारों को हर साल 10 हजार रुपए की आर्थिक सहायता दी जा रही है।
वर्ष 2025-26 में लगभग 4.96 लाख हितग्राहियों को लाभ देने के लिए 496 करोड़ रुपए स्वीकृत किए गए थे, जबकि 2026-27 के लिए 605 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है।
राज्य सरकार ने UPHAR योजना के माध्यम से कृषि क्षेत्र की निगरानी के लिए आधुनिक तकनीक अपनाने का फैसला किया है। इसके तहत सैटेलाइट इमेजरी, रिमोट सेंसिंग और ड्रोन तकनीक के जरिए फसल क्षेत्र, उत्पादन अनुमान और आपदा से होने वाले नुकसान का आकलन किया जाएगा। इस योजना के लिए 25 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है।
स्वामित्व योजना के तहत ग्रामीण आबादी को भूमि अधिकार देने का कार्य भी जारी है। राज्य में लगभग 10.50 लाख हितग्राहियों को अधिकार अभिलेख देने का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें से अब तक 1.60 लाख लोगों को अधिकार पत्र वितरित किए जा चुके हैं।
राज्य में जमीन की खरीदी-बिक्री के बाद ऑटो म्यूटेशन (स्वतः नामांतरण) की व्यवस्था लागू की गई है। अब जमीन का पंजीयन होते ही नामांतरण स्वतः क्रेता के नाम पर दर्ज हो जाता है, जिससे नागरिकों को लंबी प्रक्रिया और दफ्तरों के चक्कर लगाने से राहत मिली है।
राजस्व मंत्री ने बताया कि प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए भी मजबूत वित्तीय प्रावधान किए गए हैं। वित्तीय वर्ष 2026-27 में राज्य आपदा मोचन निधि (SDRF) के लिए 588 करोड़ रुपए, राष्ट्रीय आपदा मोचन निधि (NDRF) के लिए 50 करोड़ रुपए और राज्य आपदा न्यूनीकरण निधि (SDMF) के लिए 147 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है।
मंत्री टंकराम वर्मा ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य डिजिटल राजस्व प्रशासन, पारदर्शी व्यवस्था और प्रभावी आपदा प्रबंधन के माध्यम से नागरिकों को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराना है।