“डीपफेक पर लगेगा लेबल?” — भारत मंडपम से PM का बड़ा संदेश, मैक्रों ने की डिजिटल क्रांति की तारीफ; पिचाई बोले- AI बदलेगा अरबों की जिंदगी

नई दिल्ली। राजधानी के भारत मंडपम में चल रहे इंडिया AI इम्पैक्ट समिट 2026 के चौथे दिन वैश्विक नेताओं और टेक दिग्गजों के बीच आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के भविष्य पर बड़ी घोषणाएं हुईं।

प्रधानमंत्री Narendra Modi ने डीपफेक और फेक न्यूज के बढ़ते खतरे पर चिंता जताते हुए कहा कि जैसे खाद्य पदार्थों पर ‘न्यूट्रिशन लेबल’ होता है, वैसे ही डिजिटल कंटेंट पर भी स्पष्ट ऑथेंटिसिटी लेबल होना चाहिए, ताकि असली और AI-जनरेटेड कंटेंट में फर्क साफ हो सके। उन्होंने बच्चों की सुरक्षा के लिए AI स्पेस को “चाइल्ड सेफ” बनाने पर भी जोर दिया।


🧠 AI को लेकर भारत का अलग नजरिया

पीएम ने कहा कि जहां कई देश AI को लेकर आशंकित हैं, वहीं भारत इसे अपने उज्ज्वल भविष्य का टर्निंग पॉइंट मानता है। उन्होंने AI के लिए एक नया ग्लोबल फ्रेमवर्क प्रस्तावित किया—

Moral (नैतिक), Accountable (जवाबदेह), National Sovereignty (संप्रभु), Accessible (सुलभ) और Valid (वैध)

उनका कहना था कि AI सिर्फ डेटा प्रोसेसिंग टूल न बनकर मानवता के कल्याण का साधन बने।


🌍 110 से ज्यादा देश, 500+ AI लीडर्स

समिट में 110 से अधिक देश, 20 से ज्यादा देशों के प्रमुख, 30 अंतरराष्ट्रीय संगठन और 500 से अधिक AI लीडर्स शामिल हुए हैं।
करीब 100 CEOs और फाउंडर्स, 150 अकादमिक-रिसर्चर, 400 CTOs/VPs और 100+ सरकारी प्रतिनिधि भी मौजूद हैं।


💬 पिचाई: “साहसिक कदम उठाने होंगे”

Sundar Pichai, CEO Google, ने कहा कि AI को सबके लिए उपयोगी बनाने के लिए साहसिक कदम उठाने होंगे, क्योंकि यह अरबों लोगों की जिंदगी बेहतर बना सकता है।

उन्होंने भारत में 15 बिलियन डॉलर के इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश के तहत एक “फुल स्टैक AI हब” स्थापित करने की भी घोषणा की।


🇫🇷 मैक्रों की भारत को सराहना

फ्रांस के राष्ट्रपति Emmanuel Macron ने कहा कि भारत ने वह कर दिखाया है, जो दुनिया का कोई दूसरा देश नहीं कर सका—

  • 1.4 अरब लोगों के लिए डिजिटल पहचान

  • हर महीने 20 अरब ट्रांजैक्शन प्रोसेस करने वाला पेमेंट सिस्टम

  • 500 मिलियन डिजिटल हेल्थ आईडी जारी करने वाला हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर

उन्होंने इसे डिजिटल इनोवेशन का अद्वितीय उदाहरण बताया।


🚀 “AI नौकरियां खत्म नहीं करेगा”

पीएम मोदी ने भरोसा दिलाया कि AI नौकरियां खत्म नहीं करेगा, बल्कि नए अवसर पैदा करेगा। उन्होंने स्किलिंग और रिस्किलिंग को “मास मूवमेंट” बनाने पर जोर दिया और कहा कि आने वाला दौर इंसान और मशीन के “Co-create” करने का है।