ACB की 2007 की छापेमारी के बाद चला लंबा ट्रायल; आय से 2.09 करोड़ रुपये अधिक संपत्ति पाई गईअ
नुपातहीन संपत्ति के चर्चित मामले में अम्बिकापुर के तत्कालीन मेड बंदी सर्वेयर राकेश रमन सिंह उर्फ राकेश रंजन को विशेष न्यायालय ने दोषी ठहराते हुए 3-3 वर्ष के कठोर कारावास और कुल 11 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। यह फैसला 12 फरवरी 2026 को माननीय विशेष न्यायालय, अम्बिकापुर (जिला सरगुजा) द्वारा सुनाया गया।2007 में दर्ज हुआ था मामला
एन्टी करप्शन ब्यूरो (ACB) को आरोपी के विरुद्ध यह गोपनीय सूचना प्राप्त हुई थी कि वह कृषि विभाग, अम्बिकापुर में मेड बंदी सर्वेयर के पद पर पदस्थ रहते हुए अपने ज्ञात आय स्रोतों से अधिक संपत्ति स्वयं और परिवार के नाम पर अर्जित कर रहा है। सत्यापन के बाद प्रथम दृष्टया साक्ष्य पाए जाने पर अपराध क्रमांक 22/2007 धारा 13(1)(ई) व 13(2) भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 के तहत मामला दर्ज किया गया।
29 दिसंबर 2007 को सक्षम न्यायालय से तलाशी वारंट प्राप्त कर 30 दिसंबर 2007 को केदारपुर मिशन चौक, अम्बिकापुर स्थित आरोपी के निवास पर छापेमारी की गई थी।
आय से 2.09 करोड़ रुपये अधिक संपत्ति
विवेचना के दौरान पाया गया कि आरोपी की जांच अवधि में ज्ञात और वैध आय 1,12,90,400 रुपये थी, जबकि उसी अवधि में कुल व्यय 3,22,42,124 रुपये पाया गया।
इस प्रकार आरोपी की आय से 2,09,51,724 रुपये अधिक खर्च/संपत्ति पाई गई, जो उसकी वैध आय से 185.57 प्रतिशत अधिक थी।
2018 में पेश हुआ चालान, 2026 में आया फैसला
विधि एवं विधायी कार्य विभाग मंत्रालय, नवा रायपुर से अभियोजन स्वीकृति प्राप्त करने के बाद 21 अगस्त 2018 को विशेष न्यायालय अम्बिकापुर में चालान प्रस्तुत किया गया। सुनवाई के बाद न्यायालय ने आरोपी को धारा 13(1)(ई) एवं 13(2) पीसी एक्ट 1988 के तहत दोषी पाते हुए:
-
3-3 वर्ष का कठोर कारावास
-
6000 रुपये और 5000 रुपये का अर्थदंड
की सजा सुनाई।
करीब 19 वर्षों तक चले इस मामले में आए फैसले को भ्रष्टाचार के खिलाफ महत्वपूर्ण कार्रवाई माना जा रहा है। यह निर्णय स्पष्ट संकेत देता है कि आय से अधिक संपत्ति के मामलों में कानूनी प्रक्रिया भले लंबी हो, लेकिन अंततः दोषियों को सजा मिलती है।
