जंगल की आग पर काबू पाने के लिए बड़ी बैठक, खैरागढ़ में अफसरों को दिए गए सख्त दिशा-निर्देश

जंगल की आग पर काबू पाने के लिए बड़ी बैठक, खैरागढ़ में अफसरों को दिए गए सख्त दिशा-निर्देश

गर्मी में बढ़ती जंगल की आग को रोकने और नुकसान कम करने के लिए अफसरों को तैयारी के निर्देश

खैरागढ़।
गर्मी के मौसम में जंगलों में आग लगने की घटनाओं को रोकने और समय पर नियंत्रण करने के लिए खैरागढ़ में अहम कार्यशाला आयोजित की गई। यह बैठक इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय के ऑडिटोरियम में हुई, जिसमें दुर्ग वन वृत्त के मुख्य वन संरक्षक, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले के कलेक्टर और अन्य जिला वन अधिकारी व कर्मचारी मौजूद रहे।

📝 बैठक में दिए गए मुख्य दिशा-निर्देश

  • फायर लाइन बनाना: जंगलों में आग लगने से पहले फायर लाइन बनाई जाए।

  • संवेदनशील क्षेत्रों पर नजर: संवेदनशील इलाकों पर विशेष निगरानी रखी जाए।

  • तुरंत कार्रवाई: आग लगते ही तुरंत कंट्रोल रूम और अस्थायी केंद्रों से कार्रवाई शुरू हो।

  • सुरक्षा उपकरण: वन सुरक्षा कर्मियों को टॉर्च, जूते, पानी की बोतल, फायर ब्लोअर जैसे आवश्यक उपकरण उपलब्ध कराए जाएँ।

🔥 आग लगने के मुख्य कारण

बैठक में बताया गया कि जंगलों में आग लगने के कारणों में शामिल हैं—

  • महुआ बीनना या खेत/बाड़ी साफ करना

  • पिकनिक और आग जलाना

  • बीड़ी/सिगरेट फेंकना

  • बिजली के तारों से चिंगारी

  • होली के समय लापरवाही

🌳 जंगल और पर्यावरण पर प्रभाव

जंगल में आग लगने से—

  • पेड़-पौधों को भारी नुकसान होता है

  • जमीन की नमी कम हो जाती है

  • पर्यावरण बिगड़ता है

इसलिए आग लगते ही तुरंत बुझाना आवश्यक है।

📢 जागरूकता अभियान

अधिकारियों ने कहा कि गांवों, हाट-बाजारों और स्कूलों में पोस्टर, प्रतियोगिता और नुक्कड़ नाटक के माध्यम से लोगों को जागरूक करना जरूरी है।

🤝 विभागों का सहयोग अनिवार्य

जंगल की आग रोकने में सिर्फ वन विभाग नहीं, बल्कि राजस्व विभाग, पुलिस, दमकल और पंचायतों का भी सहयोग जरूरी है।

अधिकारियों से कहा गया कि वे पूरी जिम्मेदारी और सतर्कता के साथ काम करें, ताकि आने वाले समय में जंगलों को आग से सुरक्षित रखा जा सके।