ब्रेक फेल, तेज रफ्तार और खाई में समाई बस—87 बारातियों की चीख-पुकार से दहला लातेहार
Jharkhand Bus Accident: शादी की खुशियां लेकर निकली बारात रास्ते में ही मौत के सफर में बदल गई। छत्तीसगढ़–झारखंड बॉर्डर से सटे झारखंड के लातेहार जिले में सोमवार को एक भीषण सड़क हादसे ने हर किसी को झकझोर कर रख दिया। बारातियों से भरी बस अनियंत्रित होकर पलट गई, जिसमें 9 लोगों की मौत हो गई, जबकि 80 से ज्यादा लोग घायल बताए जा रहे हैं।
हादसा इतना भयानक था कि सड़क पर लाशें बिखरी रहीं और चारों तरफ सिर्फ चीख-पुकार और मातम का माहौल नजर आया। मरने वाले सभी लोग छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले के रहने वाले थे।
कहां और कैसे हुआ हादसा?
यह दर्दनाक हादसा लातेहार के महुआडांड़ थाना क्षेत्र की ओरसा घाटी (ओरसा बंगलादारा घाटी) में हुआ।
जानकारी के मुताबिक, छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले से 87 लोग ज्ञान गंगा स्कूल की बस में सवार होकर झारखंड के लोध गांव (महुआडांड़) सगाई कार्यक्रम में जा रहे थे।
घाटी में उतरते वक्त बस का ब्रेक अचानक फेल हो गया। तेज रफ्तार बस ने पीडब्ल्यूडी के रोड सेफ्टी गार्ड को तोड़ा, फिर एक पेड़ से टकराकर करीब 20 फीट गहरी खाई में पलट गई।
मौके पर 5 की मौत, अस्पताल में बढ़ता गया मौत का आंकड़ा
लातेहार के एसपी कुमार गौरव ने बताया कि हादसे में 5 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जिनमें 4 महिलाएं शामिल हैं।
इसके बाद—
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लातेहार अस्पताल में इलाज के दौरान 2 लोगों की मौत
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गुमला सदर अस्पताल में 2 और घायलों ने दम तोड़ा
इस तरह मृतकों की संख्या 9 तक पहुंच गई।
घायलों का हाल: कई की हालत नाजुक
एसडीएम विपिन कुमार दुबे के अनुसार—
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60 घायलों को महुआडांड़ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र
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20 से अधिक घायलों को निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया
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32 गंभीर घायलों को बेहतर इलाज के लिए रांची स्थित रिम्स (RIMS) रेफर किया जा रहा है
मृतकों की पहचान
अब तक जिन मृतकों की पहचान हुई है, उनमें शामिल हैं—
रेशांति देवी (35), प्रेमा देवी (37), सीता देवी (45), सोनमती देवी (55), सुखना भुइयां (40) और विजय भुइयां।
लातेहार अस्पताल में मृत एक महिला की पहचान की प्रक्रिया जारी है।
दो राज्यों के मुख्यमंत्री सतर्क
हादसे के बाद दोनों राज्यों के मुख्यमंत्री हालात पर नजर बनाए हुए हैं।
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झारखंड सीएम हेमंत सोरेन ने उपायुक्त को निर्देश दिया कि सभी घायलों को उचित और बेहतर इलाज मिले
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छत्तीसगढ़ के सीएम विष्णुदेव साय ने हादसे पर गहरा दुख जताते हुए मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की और घायलों के इलाज के निर्देश दिए
शादी का सफर, जो कफन में बदल गया
जिस बस में ढोल-नगाड़ों की गूंज होनी थी, वहां अब सिर्फ सिसकियां सुनाई दे रही हैं।
यह हादसा एक बार फिर घाटी सड़कों, बसों की फिटनेस और सुरक्षा इंतजामों पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।
