ये 3 जिले बदल सकते हैं देश की किस्मत! जमीन के नीचे छुपा है कच्चे तेल का खजाना?

उत्तर प्रदेश के तीन जिले—फर्रुखाबाद, औरैया और कन्नौज—अब देश की ऊर्जा मानचित्र में छा सकते हैं। इन जिलों में कच्चे तेल के भंडार की संभावना जताई जा रही है। यही वजह है कि अल्फाजियो (इंडिया) लिमिटेड ने इन क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर सर्वे और ड्रिलिंग अभियान शुरू कर दिया है।

खोज अभियान की झलक

  • अछल्दा, हसनपुर (औरैया): सेंगुर नदी के किनारे 14 दिसंबर को 180 फीट तक 20 बोरिंग की गई। चार ब्लास्ट कर तरंगें रिकॉर्ड की गईं।

  • बिधूना क्षेत्र: 18 बोरिंग और 8 ब्लास्ट किए गए।

  • अजीतमल: 40 बोरिंग और 10 ब्लास्ट।

कंपनी अधिकारियों का कहना है कि प्राप्त सैंपलों की रिपोर्ट आने के बाद ही वास्तविक स्थिति का पता चलेगा।

ऊर्जा क्षेत्र में यह खोज क्यों महत्वपूर्ण है?

नवंबर में ड्रोन कैमरे से प्रारंभिक सर्वेक्षण में कच्चे तेल की संभावना बढ़ी। ओएनजीसी (तेल एवं प्राकृतिक गैस निगम) भी क्षेत्र की भूगर्भीय संरचना की जांच कर रहा है। अगर तेल का भंडार पाया गया, तो यह स्थानीय और राष्ट्रीय आर्थिक गतिविधियों को बढ़ाने वाला एक बड़ा कदम साबित हो सकता है।

कौन-कौन से गांवों में खोदाई हुई?

  • हसनपुर, बिधूना, अजीतमल

  • शाहपुर बेंदी, खेतूपुर नारायणपुर, काजीपुर बंबा
    सर्वे अभियान में 40 से अधिक बोरिंग मशीनें लगीं और 500 मजदूर और तकनीकी कर्मचारी दिन-रात काम में जुटे रहे। सैंपलों को दिल्ली स्थित प्रयोगशालाओं में जांच के लिए भेजा गया।

कन्नौज में ड्रिल बोरिंग

हैदराबाद की टीम ने कन्नौज के चार गांवों—कुड़रा, रैपुरा, पोपपुर और तिर्वा कोतवाली बहसार—में 60 मीटर गहरी ड्रिलिंग की। बोरिंग के बाद हल्के विस्फोट कर नमूने लिए गए और लैब भेजे गए।

स्थानीय लोगों को होगा लाभ

फील्ड इंचार्ज संतोष मौर्या के अनुसार, अगर उचित मात्रा में हाइड्रोकार्बन पदार्थ पाया गया, तो क्षेत्रीय लोगों को आर्थिक लाभ मिलेगा और तेल उत्पादन के नए द्वार खुल सकते हैं।

यह खोज अभी प्रारंभिक चरण में है, लेकिन अगर सफल हुई, तो यूपी के इन जिलों की भूमिगत संपत्ति देश की ऊर्जा नीति में एक बड़ा बदलाव ला सकती है।