बिलासपुर : ट्रेन हादसे के लिए चालक दल जिम्मेदार’, अब ड्राइवर के डिब्बे में भी लगेगा CCTV

हादसे के बाद रेलवे ने बढ़ाए सुरक्षा कदम, इंजन और कोचों में शुरू हुआ कैमरा इंस्टॉलेशन

बिलासपुर। हाल ही में हुए भीषण रेल हादसे के बाद भारतीय रेलवे ने अपनी सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने का फैसला किया है। दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (SECR) जोन के तहत अब यात्री ट्रेनों के लोकोमोटिव (इंजन) केबिन और कोचों में CCTV कैमरे लगाए जा रहे हैं। अधिकारियों ने पुष्टि की है कि इस प्रक्रिया की शुरुआत हो चुकी है।

यह कदम उस समय उठाया गया है जब हाल ही में एक मालगाड़ी और मेमू यात्री ट्रेन की टक्कर में 11 यात्रियों की मौत हो गई थी और 20 से अधिक लोग घायल हुए थे। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि यात्री ट्रेन का एक हिस्सा मालगाड़ी के ऊपर चढ़ गया था।

जांच में सामने आया चालक दल की लापरवाही का मामला

दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे की प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार, हादसे का प्रमुख कारण चालक दल की लापरवाही बताई गई है। रिपोर्ट में कहा गया कि ट्रेन चालक दल ने खतरे के सिग्नल पर ट्रेन को नियंत्रित नहीं किया और समय पर रोकने में विफल रहे। इसे रेलवे की भाषा में “SPAD केस” कहा जाता है — यानी जब कोई ट्रेन बिना अनुमति के लाल सिग्नल पार कर जाती है।

मृत लोको पायलट का अनुभव और हादसे की गंभीरता

हादसे में 53 वर्षीय अनुभवी लोको पायलट विद्या सागर की मौत हो गई। वे लगभग दो दशक से रेलवे सेवा में थे और अपने अनुभव के लिए जाने जाते थे। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि अगर इंजन में पहले से CCTV कैमरे लगे होते, तो दुर्घटना के सही कारणों की पहचान करना और आसान होता।

रेल सुरक्षा आयुक्त की जांच जारी

रेल सुरक्षा आयुक्त (CRS) ने हादसे की जांच शुरू कर दी है। अब तक 19 रेलवे कर्मचारियों के बयान दर्ज किए जा चुके हैं, जबकि सहायक लोको पायलट रश्मि राज, जो इस समय इलाजरत हैं, का बयान जल्द लिया जाएगा। CRS, नागरिक उड्डयन मंत्रालय के अधीन एक स्वतंत्र निकाय है, जो रेलवे दुर्घटनाओं की जांच करता है।

सुरक्षा को लेकर केंद्र सरकार की पहल

गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने इस साल जुलाई में ट्रेनों में CCTV कैमरे लगाने की मंजूरी दी थी। रेलवे का कहना है कि यह कदम न केवल यात्रियों की सुरक्षा बढ़ाने बल्कि चालक दल की निगरानी और दुर्घटनाओं की पारदर्शी जांच के लिए भी महत्वपूर्ण है।

रेलवे अधिकारियों का मानना है कि कैमरे लगने से भविष्य में हादसों के कारणों की पहचान में आसानी होगी और सुरक्षा मानकों को और सशक्त बनाया जा सकेगा।

1997 की यादें फिर ताज़ा

रेलवे सूत्रों ने बताया कि यह हादसा 1997 के बाद बिलासपुर जिले की दूसरी बड़ी रेल दुर्घटना है। 1997 में अहमदाबाद-हावड़ा एक्सप्रेस की पांच बोगियां नदी में गिर गई थीं, जिसमें 81 यात्रियों की मौत हुई थी।

You missed