सुप्रीम कोर्ट का बड़ा इशारा! क्या अब ‘मानहानि’ अपराध नहीं रहेगी?

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा इशारा! क्या अब ‘मानहानि’ अपराध नहीं रहेगी?

जेएनयू प्रोफेसर केस की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी ने खड़ा किया नया सवाल, राहुल गांधी मामलों का भी हुआ जिक्र…

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम टिप्पणी कर पूरे देश का ध्यान खींच लिया है। अदालत ने कहा कि अब समय आ गया है कि मानहानि (Defamation) को अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया जाए। यह टिप्पणी 2016 से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान सामने आई, जिससे भविष्य में आपराधिक मानहानि कानून पर गहरा असर पड़ सकता है।

यह मामला जेएनयू प्रोफेसर अमिता सिंह से जुड़ा है। एक ऑनलाइन लेख में उन पर गंभीर आरोप लगाए गए थे कि उन्होंने एक डॉजियर तैयार किया, जिसमें विश्वविद्यालय को अश्लील गतिविधियों और आतंकवाद का अड्डा बताया गया। इस रिपोर्ट के प्रकाशन के बाद प्रोफेसर ने दिल्ली मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट कोर्ट में आपराधिक मानहानि का केस दर्ज कराया था।

2017 में संपादक और पत्रकार अजय आशीर्वाद महाप्रस्थ को तलब किया गया। दिल्ली हाईकोर्ट ने 2023 में समन रद्द कर दिया था, लेकिन 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने वह आदेश पलटते हुए केस को वापस भेज दिया। 2025 में हाईकोर्ट ने समन को सही ठहराया। इसके खिलाफ पत्रकार ने अब फिर से सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।

याचिका में तर्क:

याचिकाकर्ता पत्रकार ने दलील दी कि अब भारतीय न्याय संहिता (BNSS) लागू है और सेक्शन 223 के अनुसार शुरुआती स्तर पर ही सुनवाई होनी चाहिए। हालांकि हाईकोर्ट का कहना था कि चूंकि शिकायत 2016 की है, इसलिए नया कानून लागू नहीं होगा।

कपिल सिब्बल का बड़ा तर्क:

पत्रकार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने सुनवाई के दौरान राहुल गांधी के आपराधिक मानहानि मामलों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इस तरह की कई याचिकाएँ लंबित हैं और यह मुद्दा व्यापक महत्व का है। सुप्रीम कोर्ट ने इस पर नोटिस जारी कर दिया है।

अब सबकी नजरें इस पर टिकी हैं कि क्या सचमुच सुप्रीम कोर्ट मानहानि को अपराध की श्रेणी से बाहर करने का ऐतिहासिक कदम उठाएगा या नहीं।