लोधिमा। कहते हैं कि कुछ नया और बड़ा करने के लिए उम्र नहीं, बल्कि हौसले और मेहनत की जरूरत होती है। सरगुजा जिले के लोधिमा क्षेत्र अंतर्गत ग्राम सुंदरपुर में 13 से 14 साल के छह बच्चों ने कुछ ऐसा ही कर दिखाया, जिसकी चर्चा अब पूरे इलाके में हो रही है। इन बच्चों ने अपनी मेहनत और लगन से 25 फीट ऊंचा रावण का पुतला तैयार किया और गांव में पहली बार भव्य रावण दहन कार्यक्रम का आयोजन कर एक नई परंपरा की शुरुआत की।
दशहरा के दूसरे दिन आयोजित इस कार्यक्रम में आतिशबाजी और जय श्रीराम के जयकारों के बीच रावण दहन किया गया। इस अनोखी पहल को देखने के लिए सुंदरपुर सहित आसपास के गांवों से सैकड़ों ग्रामीण पहुंचे। छोटी उम्र में बच्चों के इस बड़े प्रयास ने सभी का दिल जीत लिया।
छोटी उम्र में बड़ा कारनामा, छह दोस्तों ने मिलकर रचा इतिहास
ग्राम सुंदरपुर में पहली बार रावण दहन आयोजित करने का बीड़ा छह बच्चों ने उठाया। महज 13 से 14 वर्ष की उम्र में इन बच्चों ने मिलकर 25 फीट ऊंचे रावण का पुतला तैयार किया। उनकी मेहनत, लगन और उत्साह ने यह साबित कर दिया कि किसी अच्छी पहल की शुरुआत करने के लिए उम्र बड़ी होना जरूरी नहीं है।
इस आयोजन में राजवीर सिंह सेंगर, सिद्धार्थ तिवारी, प्रियांशु विश्वकर्मा, अभिराज केशरी, आयुष मंडल और आयुष दास की प्रमुख भूमिका रही। इन सभी ने मिलकर गांव में पहली बार रावण दहन कराने की योजना बनाई और उसे सफलतापूर्वक पूरा भी किया।
रावण दहन होते ही आतिशबाजी से गूंज उठा सुंदरपुर
रावण दहन कार्यक्रम को लेकर गांव में खासा उत्साह देखने को मिला। बच्चों से लेकर युवाओं, महिलाओं और बुजुर्गों तक बड़ी संख्या में लोग आयोजन स्थल पर पहुंचे। जैसे ही 25 फीट ऊंचे रावण के पुतले का दहन हुआ, पूरा गांव आतिशबाजी और जय श्रीराम के जयकारों से गूंज उठा।
दशहरा के दूसरे दिन आयोजित इस कार्यक्रम ने पूरे गांव को उत्सव के रंग में रंग दिया। ग्रामीणों के लिए यह आयोजन इसलिए भी खास रहा, क्योंकि सुंदरपुर में पहली बार इस तरह सामूहिक रूप से रावण दहन का कार्यक्रम आयोजित किया गया।
बच्चों की पहल से शुरू हुई गांव में नई परंपरा
दशहरा बुराई पर अच्छाई, अधर्म पर धर्म और असत्य पर सत्य की जीत का प्रतीक है। सुंदरपुर के इन छह बच्चों ने रावण दहन के आयोजन के जरिए न केवल ग्रामीणों को एक साथ आने का अवसर दिया, बल्कि गांव में धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा की नई शुरुआत भी की।
महज 13-14 साल की उम्र में 25 फीट का रावण तैयार कर भव्य आयोजन कराने वाले इन बच्चों का प्रयास पूरे कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण रहा। ग्रामीणों ने भी उनकी पहल की सराहना की। अब उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले वर्षों में सुंदरपुर में रावण दहन का यह आयोजन और भी भव्य रूप लेगा।
छह बच्चों की यह पहल एक संदेश दे गई—अगर हौसले बुलंद हों, तो छोटी उम्र में भी बड़ा बदलाव लाया जा सकता है।
