धमतरी। छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में बहुमूल्य पत्थरों की कथित अवैध बिक्री के मामले में पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 64 वर्षीय विनोद अग्रवाल को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, आरोपी के कब्जे से 146 हीरे जैसे चमकदार पत्थर बरामद किए गए हैं। मोबाइल फोन और नकदी सहित जब्त संपत्ति की कुल अनुमानित कीमत 10 लाख 15 हजार 200 रुपये बताई गई है।
यह कार्रवाई बिरेझर चौकी और साइबर थाना धमतरी की संयुक्त टीम ने मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर की। पुलिस को जानकारी मिली थी कि नेशनल हाईवे-30 के पास एक व्यक्ति बहुमूल्य पत्थर बेचने के लिए ग्राहक तलाश रहा है। इसके बाद टीम ने मौके पर पहुंचकर घेराबंदी की और संदिग्ध को हिरासत में लिया।
कोड़ापार नहर पुलिया के पास पुलिस ने की घेराबंदी
पुलिस के अनुसार, 18 अक्टूबर 2026 को नेशनल हाईवे-30 पर कोड़ापार नहर पुलिया के पास एक व्यक्ति के बहुमूल्य पत्थर बेचने के लिए ग्राहक तलाशने की सूचना मिली थी। सूचना को गंभीरता से लेते हुए बिरेझर चौकी और साइबर थाना धमतरी की संयुक्त टीम मौके पर पहुंची।
पुलिस ने घेराबंदी कर संदिग्ध व्यक्ति को पकड़ा। पूछताछ में उसकी पहचान विनोद अग्रवाल, उम्र 64 वर्ष, निवासी केके वार्ड, भाटापारा, जिला बलौदाबाजार-भाटापारा के रूप में हुई। तलाशी के दौरान उसके पास रखी पॉलीथीन से सफेद, पारदर्शी और चमकदार पत्थर बरामद हुए।
146 पत्थर बरामद, अनुमानित कीमत 10.05 लाख रुपये
पुलिस के मुताबिक, बरामद पत्थरों की संख्या 146 है। इनका कुल वजन 16.17 ग्राम और शुद्ध वजन 13.49 ग्राम बताया गया है। पुलिस ने इनकी अनुमानित कीमत 10 लाख 5 हजार रुपये आंकी है।
पत्थरों के अलावा आरोपी के पास से एक सैमसंग गैलेक्सी S21 FE मोबाइल फोन भी जब्त किया गया, जिसकी अनुमानित कीमत 8 हजार रुपये बताई गई है। इसके साथ ही 2,200 रुपये नकद बरामद हुए। इस तरह पुलिस के अनुसार, जब्त संपत्ति की कुल अनुमानित कीमत 10 लाख 15 हजार 200 रुपये है।
हालांकि, बरामद पत्थरों को हीरा या किसी अन्य बहुमूल्य खनिज के रूप में प्रमाणित करने वाली जांच रिपोर्ट की जानकारी उपलब्ध नहीं है। उनकी वास्तविक प्रकृति और बाजार मूल्य की पुष्टि संबंधित परीक्षण के बाद ही हो सकेगी।
वर्ष 2018 में पायलीखंड खदान से चोरी करने का दावा
पुलिस के अनुसार, पूछताछ के दौरान विनोद अग्रवाल ने दावा किया कि उसने वर्ष 2018 में गरियाबंद जिले के पायलीखंड खदान क्षेत्र से इन पत्थरों को चोरी किया था। बताया गया कि अब वह उन्हें बेचने के लिए ग्राहक तलाश रहा था।
यदि पूछताछ में किए गए इस दावे की पुष्टि होती है, तो मामला केवल कथित अवैध बिक्री तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पत्थरों के स्रोत और चोरी से जुड़े पहलुओं की जांच भी महत्वपूर्ण होगी। फिलहाल आरोपी के बयान और पत्थरों की उत्पत्ति से संबंधित तथ्यों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है।
पत्थरों की असलियत और स्रोत की जांच में जुटी पुलिस
इस कार्रवाई में पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर बरामद पत्थरों, मोबाइल फोन और नकदी को जब्त किया है। अब जांच में पत्थरों की वास्तविक प्रकृति, उनकी उत्पत्ति और वर्ष 2018 में कथित चोरी के दावे से जुड़े तथ्यों का सत्यापन महत्वपूर्ण होगा।
पुलिस की आगे की जांच से यह स्पष्ट हो सकेगा कि बरामद पत्थर वास्तव में किस श्रेणी के हैं और आरोपी द्वारा बताए गए स्रोत की पुष्टि होती है या नहीं। फिलहाल मामले में पुलिस की कार्रवाई जारी है।
