नई दिल्ली। देश में 2027 के विधानसभा चुनावों को लेकर तैयारियों का सिलसिला शुरू हो गया है। अगले साल उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, गोवा और मणिपुर में विधानसभा चुनाव होने हैं। इन पांच राज्यों की विधानसभाओं में कुल 690 सीटें हैं, जिन पर अलग-अलग चरणों में मतदान कराया जा सकता है। चुनाव कार्यक्रम की औपचारिक घोषणा से पहले निर्वाचन आयोग इन राज्यों की तैयारियों का जायजा लेने की प्रक्रिया में जुट गया है।
मुख्य निर्वाचन आयुक्त और निर्वाचन आयुक्तों से मिलकर बना पूर्ण निर्वाचन आयोग चुनाव कार्यक्रम घोषित करने से पहले संबंधित राज्यों का दौरा करता है। इस दौरान चुनावी तैयारियों, प्रशासनिक व्यवस्था, सुरक्षा इंतजाम और मतदान से जुड़े संसाधनों की स्थिति की समीक्षा की जाती है।
उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा 403 विधानसभा सीटें
पांच राज्यों में सबसे बड़ा चुनाव उत्तर प्रदेश में होगा। 403 सदस्यीय उत्तर प्रदेश विधानसभा का मौजूदा कार्यकाल अगले साल 22 मई को समाप्त हो रहा है। इसके चलते राज्य में विधानसभा चुनाव की तैयारियां पहले से शुरू कर दी गई हैं।
उत्तर प्रदेश के अलावा 60 सदस्यीय मणिपुर, 40 सदस्यीय गोवा, 117 सदस्यीय पंजाब और 70 सदस्यीय उत्तराखंड विधानसभा का कार्यकाल मार्च 2027 में अलग-अलग तारीखों पर समाप्त होगा। ऐसे में इन राज्यों में भी निर्धारित समयसीमा के भीतर नई विधानसभा के गठन की प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
इन पांचों राज्यों की सीटों को जोड़ने पर कुल 690 विधानसभा सीटें बनती हैं। हालांकि, मतदान कितने चरणों में होगा और चुनाव की तारीखें क्या होंगी, इसका फैसला निर्वाचन आयोग की ओर से चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के बाद ही स्पष्ट होगा।
गोवा से शुरू होगी चुनावी राज्यों की जमीनी जांच
निर्वाचन आयोग चुनावी राज्यों की जमीनी तैयारियों की समीक्षा के लिए दौरे की प्रक्रिया शुरू करने जा रहा है। जानकारी के मुताबिक गोवा से चुनावी राज्यों की जमीनी स्तर पर जांच की शुरुआत होगी। इसके बाद आयोग की टीमें अन्य राज्यों का दौरा कर चुनाव से जुड़ी व्यवस्थाओं का जायजा लेंगी।
मणिपुर, पंजाब और उत्तराखंड के दौरे को लेकर भी निर्वाचन आयोग का कार्यक्रम तय किया गया है। इन दौरों के दौरान राज्य के अधिकारियों, राजनीतिक दलों और चुनाव से जुड़े अन्य पक्षों के साथ बैठक कर तैयारियों की समीक्षा की जाएगी।
EVM और VVPAT की जांच शुरू
चुनाव की तैयारियों के तहत उत्तर प्रदेश और गोवा में मतदान के लिए इस्तेमाल होने वाली इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन यानी EVM और VVPAT की प्रथम स्तरीय जांच यानी FLC शुरू हो गई है।
FLC के दौरान EVM और VVPAT मशीनों की तकनीकी स्थिति की जांच की जाती है। इन मशीनों का निर्माण सार्वजनिक क्षेत्र की दो कंपनियां भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड यानी BEL और इलेक्ट्रॉनिक्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड यानी ECIL करती हैं। इन कंपनियों के इंजीनियर मशीनों की तकनीकी जांच करते हैं।
जांच के दौरान यदि किसी मशीन में खराबी पाई जाती है तो उसे मरम्मत या बदलने के लिए संबंधित निर्माता के पास भेजा जाता है। इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि चुनाव के दौरान इस्तेमाल होने वाली मशीनें तकनीकी रूप से पूरी तरह तैयार रहें।
राजनीतिक दलों की मौजूदगी में होती है मॉक वोटिंग
EVM और VVPAT की प्रथम स्तरीय जांच के दौरान राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में मॉक वोटिंग भी कराई जाती है। इसके जरिए यह देखा जाता है कि मशीनें मतदान और वोट रिकॉर्ड करने की प्रक्रिया को सही तरीके से संचालित कर रही हैं या नहीं।
2027 के विधानसभा चुनावों को देखते हुए EVM और VVPAT की यह प्रक्रिया चुनावी तैयारियों का अहम हिस्सा है। आने वाले समय में अन्य चुनावी राज्यों में भी मशीनों और मतदान व्यवस्था से जुड़ी तैयारियों को आगे बढ़ाया जाएगा।
अब निर्वाचन आयोग के राज्यों के दौरे और तैयारियों की समीक्षा के बाद चुनावी प्रक्रिया को लेकर तस्वीर और स्पष्ट होने की उम्मीद है। हालांकि चुनाव की आधिकारिक तारीखों और मतदान के चरणों की घोषणा निर्वाचन आयोग द्वारा बाद में की जाएगी।
