रायपुर के तेलीबांधा थाना क्षेत्र में स्थित ट्यूलीप एरिना होटल में वित्तीय गड़बड़ी का मामला सामने आया है। होटल के दो अकाउंटेंट पर कंपनी के बैंक खाते से करीब 28.16 लाख रुपये के अनधिकृत ट्रांसफर का आरोप लगा है। ऑडिट के दौरान लेन-देन में गड़बड़ी सामने आने के बाद होटल के ऑपरेशन मैनेजर संजीव कुमार ने तेलीबांधा थाने में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के आधार पर पुलिस ने सीनियर अकाउंटेंट हिमांशु त्रिपाठी और जूनियर अकाउंटेंट नजीप जांगड़े के खिलाफ FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
शिकायत के मुताबिक, दोनों अकाउंटेंट कंपनी के बैंक खाते से भुगतान करने के लिए अधिकृत थे। आरोप है कि इसी अधिकार का कथित तौर पर गलत इस्तेमाल करते हुए कंपनी के खाते से अपने और अन्य लोगों से जुड़े बैंक खातों में रकम ट्रांसफर की गई। होटल के लेजर में इन लेन-देन को अलग-अलग व्यक्तियों और फर्मों को किए गए भुगतान के तौर पर दर्ज किए जाने की बात शिकायत में कही गई है।
शिकायत के अनुसार, सीनियर अकाउंटेंट हिमांशु त्रिपाठी पर करीब 22.34 लाख रुपये और जूनियर अकाउंटेंट नजीप जांगड़े पर करीब 5.81 लाख रुपये के अनधिकृत ट्रांसफर का आरोप है। दोनों रकम को मिलाकर कथित तौर पर करीब 28.16 लाख रुपये की वित्तीय गड़बड़ी सामने आई है। हालांकि, इन आरोपों की वास्तविकता जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
कैश बिलिंग से लेकर डिजिटल रिकॉर्ड तक जांच
मामले में सिर्फ बैंक खातों से रकम ट्रांसफर करने का ही आरोप नहीं है। शिकायत में होटल की कैश बिलिंग से प्राप्त रकम अपने पास रखने और बाद में उसे यूपीआई भुगतान के रूप में रिकॉर्ड में दिखाने का भी आरोप लगाया गया है।
इसके अलावा कथित वित्तीय गड़बड़ी को छिपाने के लिए लेखा रिकॉर्ड, कंप्यूटर सिस्टम, सॉफ्टवेयर और ई-मेल में छेड़छाड़ किए जाने की बात भी शिकायत में सामने आई है। यदि जांच में यह आरोप सही पाए जाते हैं तो मामले में वित्तीय लेन-देन के साथ डिजिटल रिकॉर्ड से जुड़ी गतिविधियों की भी अहम भूमिका हो सकती है।
बैंक ट्रांजेक्शन और डिजिटल डेटा खंगाल रही पुलिस
FIR दर्ज होने के बाद तेलीबांधा पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस बैंक ट्रांजेक्शन, होटल के अकाउंटिंग रिकॉर्ड और डिजिटल डेटा की जांच कर रही है। जांच का एक अहम हिस्सा यह पता लगाना है कि कंपनी के खाते से कथित तौर पर ट्रांसफर की गई रकम किन-किन खातों में पहुंची और बाद में उसका इस्तेमाल किस तरह किया गया।
पुलिस संबंधित बैंक खातों, लेजर एंट्री और अन्य वित्तीय दस्तावेजों का मिलान भी कर रही है। इसके साथ ही कंप्यूटर सिस्टम, अकाउंटिंग सॉफ्टवेयर और ई-मेल रिकॉर्ड में किसी तरह के बदलाव किए गए थे या नहीं, इसकी भी जांच की जा रही है।
फिलहाल मामला शिकायत में लगाए गए आरोपों और पुलिस जांच के स्तर पर है। जांच और वित्तीय रिकॉर्ड की पड़ताल के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि कुल कितनी रकम का अनधिकृत लेन-देन हुआ और इसमें किस-किस की भूमिका थी।
