CISF में नौकरी के लिए रचा फर्जीवाड़ा! जाली दस्तावेजों से बनवाया दंतेवाड़ा का निवास-आय प्रमाण पत्र, राजस्थान से आरोपी गिरफ्तार

दंतेवाड़ा। CISF में भर्ती होने के लिए फर्जी दस्तावेज तैयार कराने के मामले में दंतेवाड़ा पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस ने उत्तर प्रदेश के रायबरेली निवासी एक आरोपी को राजस्थान के देवली से गिरफ्तार किया है। आरोप है कि सत्यम दीक्षित ने जाली दस्तावेजों के जरिए दंतेवाड़ा जिले का निवास प्रमाण पत्र और आय प्रमाण पत्र हासिल किया और इन्हीं दस्तावेजों का इस्तेमाल CISF भर्ती में किया।

पुलिस के मुताबिक, आरोपी वर्तमान में राजस्थान के देवली में CISF में नौकरी कर रहा था। मामले का खुलासा दस्तावेजों के सत्यापन के दौरान हुआ, जिसके बाद पुलिस ने जांच आगे बढ़ाई और आरोपी तक पहुंच बनाई।

ऐसे खुला फर्जी दस्तावेजों का राज

सिटी कोतवाली पुलिस के मुताबिक, CISF भर्ती से जुड़े दस्तावेजों की विवेचना के दौरान आरोपी द्वारा प्रस्तुत किए गए निवास और आय प्रमाण पत्र को लेकर संदेह हुआ। इसके बाद संबंधित प्रमाण पत्रों का राजस्व अधिकारियों और तहसील कार्यालय से सत्यापन कराया गया।

सत्यापन के दौरान प्रमाण पत्र जारी कराने के लिए प्रस्तुत किए गए दस्तावेजों को लेकर महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए। पुलिस के अनुसार, जांच में दस्तावेज संदिग्ध और फर्जी पाए जाने संबंधी जानकारी सामने आने के बाद आरोपी के खिलाफ कार्रवाई की गई।

नौकरी कर रहा था राजस्थान के देवली में

पुलिस जांच में पता चला कि आरोपी सत्यम दीक्षित उत्तर प्रदेश के रायबरेली का रहने वाला है और फर्जी दस्तावेजों के आधार पर दंतेवाड़ा का निवासी और आय संबंधी प्रमाण पत्र हासिल करने के बाद इन्हें CISF भर्ती में इस्तेमाल करने का आरोप है।

पुलिस को आरोपी के राजस्थान के देवली में होने की जानकारी मिली। इसके बाद दंतेवाड़ा से पुलिस टीम राजस्थान पहुंची और आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।

न्यायालय ने भेजा जेल

गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने आरोपी को विधिसम्मत प्रक्रिया के तहत न्यायालय के समक्ष पेश किया। जहां से उसे जेल भेज दिया गया

पुलिस अब इस पूरे मामले की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है। जांच का फोकस इस बात पर भी है कि आरोपी के लिए फर्जी दस्तावेज किसने तैयार किए और दंतेवाड़ा का निवास एवं आय प्रमाण पत्र हासिल करने में किन लोगों की भूमिका रही।

फर्जीवाड़े में और कौन-कौन शामिल?

पुलिस के अनुसार, मामले में अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। यदि जांच के दौरान किसी अन्य व्यक्ति की संलिप्तता सामने आती है तो उसके खिलाफ भी वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। इससे अब यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि यह फर्जीवाड़ा केवल एक व्यक्ति तक सीमित था या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क काम कर रहा था।