शिक्षकों का फूटा गुस्सा! बारिश में भी निकली ‘TET मुक्ति रैली’, सरकार के सामने रखीं 5 बड़ी मांगें

रायपुर: छत्तीसगढ़ में शिक्षकों का आक्रोश अब सड़कों पर दिखाई देने लगा है। शिक्षक संघर्ष मोर्चा के आह्वान पर प्रदेशभर के जिला मुख्यालयों में शिक्षकों ने ‘TET मुक्ति रैली’ निकालकर प्रदर्शन किया। झमाझम बारिश के बावजूद बड़ी संख्या में शिक्षक रैली में शामिल हुए और मुख्यमंत्री, शिक्षामंत्री, शिक्षासचिव तथा DPI के नाम कलेक्टरों को ज्ञापन सौंपकर अपनी पांच सूत्रीय मांगों पर जल्द निर्णय लेने की मांग की।

शिक्षकों का कहना है कि लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों को TET की अनिवार्यता के दायरे में लाने से उनके सामने नौकरी और सेवा सुरक्षा को लेकर चिंता पैदा हो गई है। मोर्चा ने सरकार से इस मामले में स्थायी समाधान निकालने की मांग की है।

TET की अनिवार्यता खत्म करने की सबसे बड़ी मांग

शिक्षक संघर्ष मोर्चा की पांच प्रमुख मांगों में TET की अनिवार्यता समाप्त करना, संविलियन से पहले की सेवा की गणना कर पेंशन समेत सभी हितलाभ देना, केंद्रीय वेतनमान लागू कर वेतन विसंगति दूर करना, D.Ed प्रशिक्षित शिक्षकों को ब्रिज कोर्स के माध्यम से B.Ed कराने और भर्ती-पदोन्नति नियम 2026 को निरस्त करना शामिल है।

मोर्चा के प्रांतीय संचालक वीरेंद्र दुबे और केदार जैन रायपुर की रैली में शामिल हुए, जबकि संजय शर्मा ने बिलासपुर की जिला रैली में प्रदेश का प्रतिनिधित्व किया। अन्य जिलों में शालेय शिक्षक संघ, टीचर्स एसोसिएशन और संयुक्त शिक्षक संघ के जिला पदाधिकारियों की अगुवाई में प्रदर्शन किया गया।

बारिश में भी नहीं रुके शिक्षक, जमकर लगाए नारे

रैली के दौरान मौसम भी शिक्षकों के हौसले को नहीं रोक सका। बारिश के बीच बड़ी संख्या में शिक्षक जिला मुख्यालयों पर पहुंचे और अपनी मांगों को लेकर आवाज बुलंद की।

प्रांतीय संचालक वीरेंद्र दुबे ने कहा कि TET की अनिवार्यता को लेकर शिक्षकों में भारी आक्रोश है। उन्होंने केंद्र सरकार से संबंधित अध्यादेश में संशोधन कर TET की अनिवार्यता समाप्त करने की मांग की।

इसके साथ ही शिक्षकों ने केंद्रीय वेतनमान लागू करने, विभिन्न शिक्षक संवर्गों की वेतन विसंगतियां दूर करने और संविलियन से पहले की सेवा को जोड़कर सभी सेवा हितलाभ देने की मांग भी दोहराई।

‘20-28 साल सेवा के बाद भी TET क्यों?’

मोर्चा के प्रांतीय महासचिव धर्मेश शर्मा और कार्यकारी प्रांताध्यक्ष चंद्रशेखर तिवारी ने कहा कि शिक्षक अपनी योग्यता साबित करने के बाद ही शिक्षा विभाग में सेवा दे रहे हैं। उनका तर्क है कि वर्ष 2010 में लागू किए गए नियम को उससे पहले नियुक्त शिक्षकों पर लागू करना उचित नहीं है।

उन्होंने कहा कि 20 से 28 साल तक शिक्षकीय सेवा दे चुके शिक्षकों को दोबारा TET पास करने की बाध्यता से सेवा सुरक्षा को लेकर भय और तनाव पैदा हो रहा है।

मोर्चा का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद नई भर्ती से आने वाले शिक्षकों के लिए नियम लागू किया जा सकता है, लेकिन पहले से नियुक्त शिक्षकों को इसकी अनिवार्यता से बाहर रखा जाना चाहिए।

शिक्षकों का सवाल- तनाव में रहकर कैसे पढ़ाएंगे बच्चे?

प्रदेश मीडिया प्रभारी जितेंद्र शर्मा ने कहा कि जिस शिक्षक के मन में परीक्षा, नौकरी और भविष्य को लेकर लगातार चिंता बनी रहे, उससे पूरी एकाग्रता के साथ बच्चों को पढ़ाने की उम्मीद करना उचित नहीं है।

उन्होंने कहा कि शिक्षक का मानसिक तनाव केवल उसके व्यक्तिगत जीवन तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका असर कक्षा के माहौल, शिक्षक-विद्यार्थी संवाद और बच्चों की सीखने की प्रक्रिया पर भी पड़ सकता है।

मोर्चा ने सरकार से कहा कि अगर शिक्षा की गुणवत्ता बेहतर करनी है तो पहले शिक्षकों को तनावमुक्त और सुरक्षित वातावरण दिया जाना चाहिए।

ये हैं शिक्षकों की 5 प्रमुख मांगें

  1. TET की अनिवार्यता समाप्त की जाए।
  2. संविलियन से पूर्व की सेवा की गणना कर पेंशन समेत सभी हितलाभ दिए जाएं।
  3. केंद्रीय वेतनमान लागू कर वेतन विसंगतियां दूर की जाएं।
  4. D.Ed प्रशिक्षित शिक्षकों को ब्रिज कोर्स के माध्यम से B.Ed कराया जाए।
  5. भर्ती एवं पदोन्नति नियम 2026 को निरस्त किया जाए।

सरकार से जल्द फैसले की मांग

रैली के बाद शिक्षकों ने जिला प्रशासन के माध्यम से शासन तक अपनी मांगें पहुंचाई हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यह आंदोलन केवल TET परीक्षा को लेकर नहीं है, बल्कि सेवा सुरक्षा, पेंशन, वेतन और भविष्य से जुड़े व्यापक मुद्दों को लेकर है।

अब शिक्षकों की नजर सरकार के अगले कदम पर है। यदि इन मांगों पर जल्द निर्णय नहीं हुआ तो शिक्षक संघर्ष मोर्चा आगे आंदोलन को किस दिशा में ले जाता है, इस पर सभी की नजर रहेगी।