रायपुर, 25 अगस्त 2026: राजधानी रायपुर की केंद्रीय जेल में मंगलवार को एक ऐसा कार्यक्रम हुआ, जिसने स्वास्थ्य सेवा के साथ-साथ इंसानियत की मिसाल भी पेश की। राष्ट्रीय अंधत्व एवं अल्पदृष्टि नियंत्रण कार्यक्रम के तहत केंद्रीय जेल रायपुर में बंदियों के लिए निःशुल्क नेत्र परीक्षण शिविर लगाया गया। इसी के साथ रायपुर जिले में 41वें नेत्रदान पखवाड़े की भी शुरुआत हुई।
देशभर में यह नेत्रदान पखवाड़ा 25 अगस्त से 8 सितंबर तक मनाया जा रहा है। कार्यक्रम के दौरान बंदियों, जेल अधिकारियों और कर्मचारियों को नेत्रदान के महत्व की जानकारी दी गई और लोगों ने मरणोपरांत नेत्रदान का संकल्प भी लिया।
नेत्रदान को लेकर दूर की गईं भ्रांतियां
कार्यक्रम का शुभारंभ केंद्रीय जेल रायपुर के अधीक्षक योगेश सिंह क्षत्री ने किया। उन्होंने कहा कि नेत्रदान मानवता की सेवा का महत्वपूर्ण माध्यम है। व्यक्ति अपनी इच्छा से उम्र, लिंग, रक्त समूह या धर्म की परवाह किए बिना नेत्रदान का संकल्प ले सकता है।
उन्होंने कहा कि मृत्यु के बाद किसी जरूरतमंद व्यक्ति के जीवन में रोशनी लाने का यह बेहद पुनीत प्रयास है।
डॉक्टर ने बताया- सिर्फ 10 से 15 मिनट में पूरी होती है प्रक्रिया
स्वास्थ्य विभाग के नेत्र चिकित्सक डॉ. मुकेश भगत ने नेत्रदान से जुड़ी भ्रांतियों और जरूरी सावधानियों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि नेत्रदान से मुख्य रूप से कॉर्निया से संबंधित दृष्टिहीनता वाले मरीजों को लाभ मिल सकता है।
उन्होंने बताया कि मृत्यु के बाद निर्धारित समय-सीमा के भीतर कॉर्निया निकालना जरूरी होता है। नेत्रदान की प्रक्रिया सामान्यतः 10 से 15 मिनट में पूरी हो जाती है और इससे मृत व्यक्ति के चेहरे पर किसी तरह का निशान या विकृति नहीं आती।
डॉक्टर ने लोगों से नेत्रदान को लेकर फैली गलत धारणाओं से दूर रहने और अधिक से अधिक लोगों को इसके लिए जागरूक करने की अपील की।
बंदियों की आंखों की हुई जांच
शिविर में स्वास्थ्य विभाग की विशेषज्ञ टीम ने केंद्रीय जेल में बंदियों का नेत्र परीक्षण किया। चिकित्सकों ने आंखों से जुड़ी समस्याओं की जांच करने के साथ ही बंदियों को आंखों की देखभाल और दृष्टि संबंधी परेशानियों से बचाव के लिए जरूरी परामर्श दिया।
स्वास्थ्य विभाग की टीम में नेत्र चिकित्सक डॉ. मुकेश भगत, डॉ. टिकेश्वर, महिला खंड के लिए डॉ. स्वाति शर्मा और डॉ. आकांक्षा सहित नेत्र चिकित्सा सहायक अधिकारी संजय शर्मा, आर.पी. यादव, प्रकाश राठौर, ललित पाटकर, अशोक श्रीवास और प्रवीण शर्मा समेत अन्य चिकित्सक एवं नेत्र चिकित्सा सहायक शामिल रहे।
बंदियों और जेलकर्मियों ने लिया नेत्रदान का संकल्प
कार्यक्रम में केंद्रीय जेल रायपुर के बंदियों के साथ बड़ी संख्या में अधिकारी और कर्मचारी भी शामिल हुए। सभी ने नेत्रदान के महत्व को समझते हुए मरणोपरांत नेत्रदान का संकल्प लिया।
उपस्थित लोगों ने अपने परिवार और परिजनों को भी नेत्रदान के लिए प्रेरित करने की बात कही। कार्यक्रम का उद्देश्य लोगों में नेत्रदान के प्रति जागरूकता बढ़ाना और इससे जुड़ी भ्रांतियों को दूर करना रहा।
8 सितंबर तक चलेगा नेत्रदान पखवाड़ा
देशभर में 25 अगस्त से शुरू हुआ 41वां नेत्रदान पखवाड़ा 8 सितंबर तक चलेगा। इस दौरान लोगों को मृत्यु के बाद नेत्रदान के महत्व के बारे में जागरूक किया जाएगा। राष्ट्रीय कार्यक्रम के तहत नेत्र बैंकिंग और कॉर्निया प्रत्यारोपण सेवाओं को भी मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है।
