रायपुर, 24 अगस्त 2026: छत्तीसगढ़ के सुदूर वनांचल नारायणपुर में कभी रसोई का मतलब लकड़ी, कंडे और धुएं से भरा चूल्हा हुआ करता था। घर की महिलाओं को सुबह होते ही जंगल की ओर निकलना पड़ता था। घंटों पैदल चलकर लकड़ियां इकट्ठा करना और फिर सिर पर लकड़ी का भारी गट्ठर लेकर घर लौटना उनकी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा था।
लेकिन अब तस्वीर बदल रही है। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना ने नारायणपुर के ग्रामीण और दुर्गम इलाकों की हजारों महिलाओं को धुएं से राहत देकर स्वच्छ रसोई का सहारा दिया है। जिले में अब तक 22 हजार 18 पात्र परिवारों को LPG गैस कनेक्शन उपलब्ध कराया जा चुका है।
जहां कभी धुआं ही धुआं था, वहां अब साफ-सुथरी रसोई
उज्ज्वला योजना से पहले गरीब परिवारों में खाना पकाने के लिए मुख्य रूप से लकड़ी और उपलों का इस्तेमाल किया जाता था। लगातार धुएं के बीच खाना बनाने से महिलाओं और बच्चों को सांस संबंधी परेशानियों और आंखों में जलन जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता था।
गैस चूल्हा मिलने के बाद इन परिवारों की रसोई में बड़ा बदलाव आया है। अब खाना पकाने के दौरान घर के भीतर धुआं नहीं भरता और महिलाओं को लकड़ी के चूल्हे पर घंटों बैठने की मजबूरी भी कम हुई है।
योजना का उद्देश्य घरेलू वायु प्रदूषण को कम करने के साथ महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाना है।
जंगल की पगडंडी से मिली राहत, बचने लगा घंटों का समय
नारायणपुर जैसे वनांचल क्षेत्रों में लकड़ी इकट्ठा करना आसान काम नहीं था। महिलाओं को कई किलोमीटर तक पैदल जाना पड़ता था। इसके बाद लकड़ी का भारी गट्ठर लेकर घर लौटना पड़ता था।
उज्ज्वला योजना से गैस कनेक्शन मिलने के बाद इस रोजाना की मशक्कत से काफी राहत मिली है। अब लकड़ी जुटाने में लगने वाला समय महिलाएं बच्चों की पढ़ाई-लिखाई, परिवार की देखभाल और आजीविका से जुड़ी गतिविधियों में लगा पा रही हैं।
कई महिलाएं स्व-सहायता समूहों और दूसरे सामुदायिक कार्यों में भी अधिक सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।
बारिश में गीली लकड़ी से खाना पकाने की परेशानी भी कम
बरसात के मौसम में लकड़ी गीली होने से चूल्हा जलाना और खाना पकाना और भी मुश्किल हो जाता था। गीली लकड़ी से ज्यादा धुआं निकलता था और खाना बनाने में भी ज्यादा समय लगता था।
गैस कनेक्शन मिलने से इस परेशानी से भी महिलाओं को राहत मिली है। योजना के तहत पात्र लाभार्थियों को जमा-रहित LPG कनेक्शन और जरूरी उपकरण उपलब्ध कराए जाते हैं। वर्तमान व्यवस्था में पहला रिफिल और चूल्हा भी नि:शुल्क दिए जाने की जानकारी दी गई है, जिससे गरीब परिवारों पर शुरुआती आर्थिक बोझ कम होता है।
22,018 कनेक्शन सिर्फ आंकड़ा नहीं, बदली हुई जिंदगी की कहानी
नारायणपुर जिले में दिए गए 22 हजार 18 LPG कनेक्शन महज सरकारी आंकड़ा नहीं हैं। इनके पीछे उन हजारों परिवारों की कहानी है, जिनके घरों में अब धुएं की जगह स्वच्छ ईंधन ने जगह बनाई है।
इस बदलाव से महिलाओं को समय और श्रम की बचत, रसोई में बेहतर वातावरण और परिवार की देखभाल के लिए अधिक समय मिल रहा है।
स्वच्छ रसोई से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ता कदम
उज्ज्वला योजना का असर सिर्फ रसोई तक सीमित नहीं है। जब महिलाओं को रोजाना लकड़ी जुटाने की मेहनत से राहत मिलती है, तो उनके पास अपनी दूसरी जरूरतों और कामों के लिए समय बचता है।
यही समय उन्हें स्व-सहायता समूहों, आजीविका गतिविधियों और सामाजिक कार्यों से जुड़ने का अवसर देता है। इस तरह स्वच्छ ईंधन सिर्फ चूल्हे को नहीं बदल रहा, बल्कि महिलाओं की रोजमर्रा की जिंदगी में भी बदलाव ला रहा है।
धुएं से सुविधा तक, नारायणपुर में बदल रही तस्वीर
नारायणपुर की इन महिलाओं के लिए उज्ज्वला योजना का मतलब सिर्फ गैस कनेक्शन नहीं है। यह लकड़ी के गट्ठर से राहत, धुएं से मुक्ति, समय की बचत और सम्मान के साथ जीवन जीने की दिशा में एक कदम है।
22 हजार से ज्यादा परिवारों तक पहुंचा LPG कनेक्शन यह दिखाता है कि जब योजनाओं का लाभ दूर-दराज के गांवों और जरूरतमंद परिवारों तक पहुंचता है, तो उसका असर सीधे लोगों के जीवन में दिखाई देता है।
