सूरजपुर: सरकारी डॉक्टर पर गंभीर आरोप! कलेक्टर को फिर भेजा गया स्मरण पत्र, निजी क्लीनिक और अल्ट्रासाउंड सेंटर की जांच की उठी मांग

सूरजपुर। सूरजपुर जिले के रामानुजनगर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में पदस्थ एक सरकारी डॉक्टर के खिलाफ की गई शिकायत पर अब तक कार्रवाई नहीं होने का मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। शिकायतकर्ता ने कलेक्टर सूरजपुर को स्मरण पत्र (रिमाइंडर) सौंपते हुए तत्काल निष्पक्ष जांच और आवश्यक कार्रवाई की मांग की है।

शिकायतकर्ता प्रमोद कुमार पाण्डेय का कहना है कि उन्होंने 27 मार्च 2026 को कलेक्टर के समक्ष लिखित शिकायत प्रस्तुत की थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र रामानुजनगर में पदस्थ एमबीबीएस डॉ. डी. के. विश्वकर्मा शासकीय सेवा में रहते हुए निजी क्लीनिक का संचालन कर रहे हैं। साथ ही बिना आवश्यक वैधानिक अनुमति के एक्स-रे और सोनोग्राफी (अल्ट्रासाउंड) सेवाएं भी संचालित किए जाने का आरोप लगाया गया था।

शिकायतकर्ता के अनुसार, उस समय शिकायत के साथ आरटीआई से प्राप्त दस्तावेज और अन्य संबंधित साक्ष्य भी प्रस्तुत किए गए थे। इसके बावजूद करीब चार महीने बीत जाने के बाद भी न तो किसी निष्पक्ष जांच की जानकारी दी गई और न ही किसी प्रकार की विभागीय या वैधानिक कार्रवाई की गई।

स्मरण पत्र में यह भी कहा गया है कि कार्रवाई नहीं होने के कारण संबंधित डॉक्टर आज भी कथित रूप से निजी क्लीनिक का संचालन कर रहे हैं, जिससे सरकारी सेवा नियमों के उल्लंघन का आरोप लगातार बना हुआ है और आम लोगों का प्रशासन पर विश्वास भी प्रभावित हो रहा है।

स्मरण पत्र में प्रशासन से की गई प्रमुख मांगें

  • 27 मार्च 2026 को दी गई शिकायत की तत्काल उच्च स्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए।
  • जांच पूरी होने तक निजी क्लीनिक तथा एक्स-रे एवं सोनोग्राफी सेवाओं की वैधानिकता की जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाए।
  • यदि किसी जांच अधिकारी की नियुक्ति की गई है तो उसकी जानकारी और अब तक हुई कार्रवाई से शिकायतकर्ता को अवगत कराया जाए।
  • शिकायत पर हुई देरी के कारणों की जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।
  • इस आवेदन को स्मरण पत्र मानते हुए शीघ्र आवश्यक कार्रवाई की जाए।

फिलहाल इस मामले में जिला प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यदि शिकायत में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित मामले में विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। वहीं, जांच पूरी होने तक आरोपों की आधिकारिक पुष्टि होना शेष है।

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