गंगरेल बांध के पानी में उतरे डुबान प्रभावित, जमीन और पुनर्वास के लिए जल सत्याग्रह से बढ़ा तनाव; ग्रामीणों का अनिश्चितकालीन आंदोलन का ऐलान

 

धमतरी। छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में गंगरेल बांध से प्रभावित ग्रामीणों का विरोध प्रदर्शन तेज हो गया है। अपनी मांगों को लेकर डुबान प्रभावितों ने बांध के तट पर जल सत्याग्रह शुरू कर दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें अब तक भूमि और उचित विस्थापन का लाभ नहीं मिला है। इसी मांग को लेकर प्रदर्शनकारियों ने अनिश्चितकालीन जल सत्याग्रह करने का ऐलान किया है।

प्रदर्शन के दौरान ग्रामीण अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं। उनका कहना है कि प्रभावित परिवारों को न्याय मिलने और पुनर्वास से जुड़ी समस्याओं का समाधान होने तक आंदोलन जारी रखा जाएगा। इस घटनाक्रम के बाद इलाके में प्रशासनिक गतिविधियां तेज हो गई हैं।

हाईकोर्ट के आदेश की अवहेलना का आरोप

डुबान प्रभावित ग्रामीणों ने जिला प्रशासन पर हाईकोर्ट के आदेश की अवहेलना करने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि प्रभावित परिवारों को भूमि उपलब्ध कराने और उचित तरीके से विस्थापित करने की मांग लंबे समय से उठाई जा रही है, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हो पाया है।

ग्रामीणों की प्रमुख मांग है कि प्रभावित परिवारों को भूमि और पुनर्वास से जुड़ा उचित लाभ दिया जाए। हालांकि, हाईकोर्ट के आदेश का वास्तविक दायरा, उसके अनुपालन की स्थिति और प्रशासन का पक्ष उपलब्ध जानकारी में स्पष्ट नहीं है। इन पहलुओं की पुष्टि संबंधित आदेश और प्रशासनिक प्रतिक्रिया से होना जरूरी है।

गंगरेल बांध तट पर जल सत्याग्रह, आंदोलन जारी रखने की चेतावनी

अपनी मांगों को प्रशासन तक पहुंचाने के लिए ग्रामीणों ने गंगरेल बांध के तट पर जल सत्याग्रह का रास्ता अपनाया है। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया है कि वे केवल आश्वासन से संतुष्ट नहीं होंगे और मांगों पर ठोस कार्रवाई चाहते हैं।

अनिश्चितकालीन जल सत्याग्रह के ऐलान से आंदोलन के आगे बढ़ने की संभावना है। ग्रामीणों की मांग है कि डुबान प्रभावित परिवारों के पुनर्वास और भूमि संबंधी मुद्दों का समाधान किया जाए, ताकि उन्हें अपने अधिकारों के लिए लगातार संघर्ष न करना पड़े।

मौके पर पहुंचा प्रशासनिक अमला

जल सत्याग्रह की सूचना मिलने के बाद प्रशासनिक अमला मौके पर पहुंच गया। अब प्रशासन और प्रदर्शनकारियों के बीच बातचीत तथा मांगों पर होने वाली कार्रवाई पर नजर बनी हुई है।

फिलहाल, ग्रामीणों ने आंदोलन समाप्त करने को लेकर कोई स्पष्ट घोषणा नहीं की है। अब देखना होगा कि प्रशासन उनकी मांगों पर क्या कदम उठाता है और भूमि तथा विस्थापन से जुड़े विवाद का समाधान किस तरह निकाला जाता है।

 

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