रायपुर में 24 घंटे में 132 अपहरण केस दर्ज, लापता लोगों की तलाश होगी तेज; सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद पुलिस का बड़ा एक्शन

 

रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में लापता लोगों को लेकर पुलिस ने अब कार्रवाई का तरीका बदल दिया है। पिछले 24 घंटे में ही पुलिस ने लापता लोगों से जुड़े 132 मामलों में अपहरण का प्रकरण दर्ज किया है। इनमें रायपुर पुलिस कमिश्नरी क्षेत्र के 92 और ग्रामीण रायपुर के 40 मामले शामिल हैं। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, मई-जून में लापता हुए और अब तक नहीं मिले लोगों के मामलों में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद अपहरण का केस दर्ज कर उनकी तलाश नए सिरे से शुरू की जा रही है।

पहले इनमें से कई मामलों में केवल गुम इंसान की शिकायत दर्ज होती थी। अब ऐसे मामलों को गंभीरता से लेते हुए एफआईआर दर्ज कर जांच आगे बढ़ाई जा रही है। पुलिस की ओर से लापता लोगों की तलाश के लिए अलग-अलग टीमों को सक्रिय करने की बात कही गई है।

पहले गुम इंसान की शिकायत, अब अपहरण का केस

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, अब तक 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लापता होने पर अपहरण का मामला दर्ज किया जाता था। वहीं 18 वर्ष या उससे अधिक उम्र के व्यक्ति के लापता होने पर आमतौर पर गुम इंसान की शिकायत दर्ज होती थी और अपहरण की एफआईआर नहीं की जाती थी।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद 5 मई से लापता लोगों के मामलों में अपहरण का केस दर्ज कर उनकी गंभीरता से तलाश करने के निर्देश दिए गए हैं। इसी के तहत पुराने मामलों की भी समीक्षा की जा रही है और जिन लोगों का अब तक पता नहीं चला है, उनके मामलों में अपहरण की धाराओं के तहत कार्रवाई की जा रही है।

खमतराई पुलिस ने उत्तर प्रदेश से तीन आरोपियों को पकड़ा

इसी कार्रवाई के बीच खमतराई पुलिस ने अपहरण के एक मामले में तीन आरोपियों को उत्तर प्रदेश से गिरफ्तार किया है। आरोपियों पर प्रतीक राय के अपहरण का आरोप है। पुलिस के मुताबिक, पहले यह मामला गुम इंसान की शिकायत के तौर पर दर्ज था, लेकिन अब इसे अपहरण के प्रकरण में बदलकर जांच की जा रही है।

पुलिस का कहना है कि पुराने मामलों में भी नए सिरे से जांच कर लापता लोगों तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है।

राज्य में 1.03 लाख से ज्यादा लोग हुए लापता

पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2021 से अप्रैल 2026 तक छत्तीसगढ़ में कुल 1,03,766 लोग लापता हुए। इनमें से पुलिस ने 87,035 लोगों को तलाश कर बरामद कर लिया है। वहीं 16,731 लोग अब तक नहीं मिल पाए हैं। यह कुल लापता लोगों का करीब 16.13 प्रतिशत है।

पुलिस के अनुसार, इन लोगों की तलाश जारी है और अलग-अलग अभियानों के जरिए लापता लोगों को खोजने की कोशिश की जा रही है।

ऑपरेशन तलाश और मुस्कान से अप्रैल में 4 हजार से ज्यादा बरामद

पुलिस के मुताबिक, ऑपरेशन तलाश और मुस्कान के तहत अप्रैल में ही राज्यभर में 4,056 लापता लोगों को खोजा गया। इनमें 545 बच्चे और 3,511 महिला-पुरुष शामिल हैं।

बरामद किए गए बच्चों में 75 लड़के और 470 लड़कियां शामिल थीं। वहीं महिला-पुरुषों में 972 पुरुष और 2,539 महिलाएं बरामद की गईं। पुलिस के मुताबिक, बरामद सभी लोगों को उनके परिजनों को सौंप दिया गया।

पुलिस ने यह भी बताया कि कुछ लड़कियां जब लापता हुई थीं, तब नाबालिग थीं और बरामदगी के समय मां बन चुकी थीं। अप्रैल में दुर्ग से 683, बिलासपुर से 648 और रायपुर से 426 लापता लोगों को तलाश कर बरामद किया गया।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद पुलिस की जिम्मेदारी पर जोर

अधिवक्ता विपिन अग्रवाल के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट ने गुम इंसानों और विशेष रूप से बच्चों की तलाश को लेकर पुलिस की जिम्मेदारी तय की है। उनका कहना है कि किसी व्यक्ति के लापता होने की सूचना मिलने के बाद पुलिस को तत्काल जांच शुरू करनी चाहिए और कार्रवाई केवल कागजी प्रक्रिया तक सीमित नहीं रहनी चाहिए।

बच्चों के लापता होने के मामलों में शुरुआत से ही अपहरण या मानव तस्करी की आशंका को ध्यान में रखकर जांच करने पर जोर दिया गया है। गुम बच्चे की शिकायत को एफआईआर में दर्ज करने और तत्काल फॉलोअप जांच शुरू करने की जरूरत बताई गई है। शुरुआती घंटों में पुलिस की कार्रवाई को अहम माना जाता है।

अब छत्तीसगढ़ में बालिग लोगों के लापता होने के मामलों में भी अपहरण का केस दर्ज कर जांच आगे बढ़ाने की प्रक्रिया शुरू हुई है। रायपुर में एक ही दिन में 132 मामले दर्ज होना इसी बदले हुए जांच दृष्टिकोण का हिस्सा बताया जा रहा है। पुलिस का दावा है कि राज्य में अब भी लापता लोगों की तलाश को प्राथमिकता के साथ आगे बढ़ाया जा रहा है।