Youth Innovation Conclave: सीएम साय बोले- नौकरी के पीछे मत भागो, खुद रोजगार देने वाले बनो; युवाओं के लिए 500 करोड़ की योजना

 

रायपुर। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रदेश के युवाओं से नौकरी तलाशने के साथ-साथ रोजगार के नए अवसर पैदा करने की दिशा में आगे बढ़ने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की युवा शक्ति प्रदेश के भविष्य की सबसे बड़ी पूंजी है। युवाओं के कौशल, नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा देकर प्रदेश को विकसित छत्तीसगढ़ की दिशा में आगे ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई जा सकती है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने राजधानी रायपुर स्थित इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कृषक मंडपम में आयोजित तीन दिवसीय यूथ इनोवेशन एवं एंटरप्रेन्योरशिप कॉन्क्लेव-2026 में प्रदेशभर से पहुंचे विद्यार्थियों, युवा नवाचारकर्ताओं और स्टार्टअप उद्यमियों को संबोधित करते हुए यह बात कही। उन्होंने कहा कि आज का युवा केवल अवसर का इंतजार करने वाला नहीं है, बल्कि अपनी प्रतिभा और नए विचारों के दम पर अवसर पैदा करने की क्षमता रखता है।

युवाओं के लिए 500 करोड़ की स्टार्टअप योजना

मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश के युवाओं को उद्यमिता के क्षेत्र में आगे बढ़ाने के लिए मुख्यमंत्री स्टार्टअप एवं निपुण योजना पर काम किया जा रहा है। इस योजना के लिए 500 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं के जरिए युवाओं को स्वरोजगार और उद्यमिता के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने नई औद्योगिक नीति-2024 का जिक्र करते हुए कहा कि इसमें नए उद्यमियों के लिए कई तरह के प्रोत्साहन दिए गए हैं। महिलाओं, अनुसूचित जाति-जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और दिव्यांगजनों सहित विभिन्न वर्गों की उद्यमिता को विशेष प्रोत्साहन देने का प्रावधान किया गया है। स्थानीय स्तर पर अधिक रोजगार पैदा करने वाले उद्योगों के लिए भी विशेष प्रावधान रखे गए हैं।

उन्होंने युवाओं से नई औद्योगिक नीति का अध्ययन करने और उसमें उपलब्ध अवसरों का लाभ उठाने की अपील की। मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में नए औद्योगिक पार्क विकसित किए जा रहे हैं और सिंगल विंडो सिस्टम के माध्यम से उद्योग लगाने की प्रक्रियाओं को सरल बनाने का प्रयास किया गया है।

नई औद्योगिक नीति के बाद 8.23 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि नई औद्योगिक नीति लागू होने के बाद छत्तीसगढ़ को अब तक लगभग 8 लाख 23 हजार करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। उन्होंने कहा कि निवेश की प्रक्रिया केवल प्रस्तावों तक सीमित नहीं है, बल्कि कई परियोजनाओं पर धरातल पर काम भी शुरू हो चुका है।

उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में पारंपरिक उद्योगों के साथ ऊर्जा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा सेंटर, सेमीकंडक्टर, टेक्सटाइल और अन्य उभरते क्षेत्रों में भी निवेश की संभावनाएं बढ़ रही हैं। प्रदेश की प्राकृतिक संपदा, ऊर्जा क्षमता और देश के मध्य में स्थित भौगोलिक स्थिति के साथ सड़क, रेल और हवाई कनेक्टिविटी में हो रहे विस्तार को उन्होंने निवेश और उद्यमिता के लिए महत्वपूर्ण बताया।

2047 तक विकसित छत्तीसगढ़ का लक्ष्य

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2047 तक विकसित भारत के निर्माण का संकल्प रखा है। इसी दिशा में छत्तीसगढ़ को भी विकसित राज्य बनाने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2047 तक प्रदेश की अर्थव्यवस्था को लगभग 75 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचाने का लक्ष्य है।

मुख्यमंत्री के अनुसार, इस लक्ष्य को हासिल करने में सरकार के साथ युवाओं, किसानों, उद्यमियों, वैज्ञानिकों, शोधार्थियों और प्रदेश के प्रत्येक नागरिक की भागीदारी महत्वपूर्ण होगी। उन्होंने विशेष रूप से युवाओं से टेक्नोलॉजी, रिसर्च, इनोवेशन और एंटरप्रेन्योरशिप के क्षेत्र में आगे आने की अपील की।

कृषि और वन संपदा में छिपे हैं स्टार्टअप के बड़े अवसर

युवाओं के साथ संवाद के दौरान मुख्यमंत्री ने अपने किसान परिवार और गांव बगिया से जुड़े अनुभव भी साझा किए। उन्होंने कहा कि वे किसान परिवार से आते हैं और खेती-किसानी तथा पशुपालन से जुड़े रहे हैं। इसलिए कृषि क्षेत्र की चुनौतियों और संभावनाओं को करीब से समझते हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ कृषि प्रधान प्रदेश है और आधुनिक तकनीक तथा नवाचार को कृषि से जोड़कर युवाओं के लिए उद्यमिता के बड़े अवसर तैयार किए जा सकते हैं। कृषि के अलावा जैव प्रौद्योगिकी, खाद्य प्रसंस्करण, डिजिटल टेक्नोलॉजी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में भी युवा नए उद्यम खड़े कर सकते हैं।

उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की वन संपदा में भी वैल्यू एडिशन की बड़ी संभावनाएं हैं। बस्तर सहित वन क्षेत्रों में इमली, महुआ, सीताफल और औषधीय पौधों जैसी वनोपज उपलब्ध है। इनके आधुनिक प्रसंस्करण, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और मार्केटिंग के जरिए स्थानीय स्तर पर नए व्यवसाय और रोजगार के अवसर तैयार किए जा सकते हैं।

सुगंधित चावल से लेकर निर्यात तक पर हुई चर्चा

कॉन्क्लेव के दौरान एक युवा उद्यमी ने सुगंधित चावल के निर्यात को लेकर मुख्यमंत्री से सवाल किया। इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ को धान का कटोरा कहा जाता है और प्रदेश में जवाफूल, विष्णुभोग, हनुमानभोग और शीतलचीनी जैसी कई विशिष्ट एवं सुगंधित धान की किस्में हैं।

उन्होंने कहा कि इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय में धान की हजारों किस्मों का संरक्षण किया जा रहा है। अब जरूरत केवल उत्पादन बढ़ाने की नहीं, बल्कि प्रोसेसिंग, पैकेजिंग, ब्रांडिंग, वैल्यू एडिशन और निर्यात की पूरी श्रृंखला विकसित करने की है। इससे किसानों को बेहतर मूल्य मिलने के साथ कृषि आधारित स्टार्टअप्स के लिए नए बाजार भी तैयार हो सकते हैं।

स्टार्टअप फंडिंग और रोजगार पर युवाओं ने पूछे सवाल

कॉन्क्लेव में युवाओं ने मुख्यमंत्री से स्टार्टअप फंडिंग, लोन में कोलेटरल, सरकारी योजनाओं से मिलने वाले सहयोग, रोजगार सृजन, हॉर्टिकल्चर विद्यार्थियों के कौशल, सोशल मीडिया और इन्फ्लुएंसर इकोसिस्टम तथा प्रस्तावित फिल्म सिटी से बनने वाले अवसरों को लेकर सवाल किए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि रोजगार और व्यवसाय की प्रकृति तेजी से बदल रही है। सरकार युवाओं की आकांक्षाओं और बदलती तकनीक को ध्यान में रखते हुए भविष्य की जरूरतों के अनुरूप संभावनाएं विकसित करने पर काम कर रही है। उन्होंने युवाओं से असफलता से डरने के बजाय नए प्रयोग करने का साहस रखने को कहा।

बायोटेक्नोलॉजी इन्क्यूबेशन सेंटर का किया अवलोकन

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय परिसर में नवनिर्मित सुभाष चंद्र बोस बायोटेक्नोलॉजी इन्क्यूबेशन सेंटर का भी अवलोकन किया। उन्होंने यहां विकसित अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं, वैज्ञानिक उपकरणों और स्टार्टअप्स के लिए उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी ली तथा वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों से चर्चा की।

उन्होंने बायोसेफ्टी लेवल लैब, एनिमल कल्चर लैब, माइक्रोबियल सेल और प्लांट टिश्यू कल्चर लैब सहित विभिन्न आधुनिक प्रयोगशालाओं का निरीक्षण किया। सेंटर में स्टार्टअप्स के लिए इन्क्यूबेशन स्पेस, ड्राई और वेट लैब, प्लग एंड प्ले ऑफिस, कॉमन इंस्ट्रूमेंटेशन लैब तथा एनालिटिकल टेस्टिंग जैसी सुविधाएं विकसित की गई हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह केंद्र विद्यार्थियों, शोधार्थियों और स्टार्टअप्स के लिए आइडिया से इनोवेशन और इनोवेशन से एंटरप्राइज तक की यात्रा में महत्वपूर्ण मंच बन सकता है। यहां स्टार्टअप्स को मेंटरिंग, तकनीक हस्तांतरण, उत्पाद विकास और संस्थागत सहयोग उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है।

‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान के तहत पौधरोपण

मुख्यमंत्री ने इन्क्यूबेशन सेंटर परिसर में ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान के तहत मौलश्री का पौधा भी रोपा। इस दौरान उन्होंने पर्यावरण संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़ने और पौधरोपण के साथ उनके संरक्षण पर भी जोर दिया।

एग्रीटेक से एआई और डीप-टेक तक दिखे नवाचार

तीन दिवसीय यूथ इनोवेशन एवं एंटरप्रेन्योरशिप कॉन्क्लेव में कृषि एवं एग्रीटेक, खाद्य प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन, जैव प्रौद्योगिकी, ग्रामीण उद्यमिता, डिजिटल टेक्नोलॉजी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डीप-टेक, नवीकरणीय ऊर्जा और पर्यावरण जैसे क्षेत्रों से जुड़े स्टार्टअप्स ने अपने नवाचार, तकनीक और उत्पाद प्रदर्शित किए।

कॉन्क्लेव में विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं, नवाचारकर्ताओं, स्टार्टअप्स, निवेशकों और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों को एक साझा मंच मिला। यहां नए विचारों को तकनीक, बाजार और निवेश से जोड़ने की संभावनाओं पर चर्चा हुई।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की युवा पीढ़ी में प्रतिभा और सामर्थ्य की कमी नहीं है। जरूरत युवाओं को सही अवसर और मंच देने की है। उन्होंने कहा कि युवा अपनी प्रतिभा, नवाचार और उद्यमिता के जरिए स्वयं आगे बढ़ने के साथ दूसरे युवाओं के लिए भी रोजगार और अवसर पैदा कर सकते हैं।

इस अवसर पर इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल सहित वरिष्ठ अधिकारी, वैज्ञानिक, युवा उद्यमी, स्टार्टअप प्रतिनिधि और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।