जगदलपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित झीरम घाटी नक्सली हमले के मामले में सोमवार को आने वाला फैसला एक बार फिर टल गया। NIA की विशेष अदालत ने अब अंतिम निर्णय के लिए 5 सितंबर की तारीख तय की है। इससे पहले 12 अगस्त को सुनवाई के दौरान अदालत ने 31 अगस्त को फैसला सुनाने के लिए निर्णय सुरक्षित रखा था, लेकिन सोमवार को सुनवाई के बाद तारीख आगे बढ़ा दी गई।
करीब 13 साल पुराने इस मामले के फैसले पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। 25 मई 2013 को हुए इस हमले में कांग्रेस के कई शीर्ष नेताओं समेत बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई थी। हमले के बाद माओवादियों ने इसकी जिम्मेदारी लेते हुए इसे एंबुश के जरिए अंजाम देने की बात कही थी।
काफिले को रोककर शुरू हुई थी अंधाधुंध फायरिंग
25 मई 2013 को कांग्रेस की ओर से बस्तर में परिवर्तन यात्रा का आयोजन किया गया था। कार्यक्रम खत्म होने के बाद कांग्रेस नेताओं का काफिला सुकमा से जगदलपुर की ओर रवाना हुआ था।
काफिले में करीब 25 गाड़ियां थीं और लगभग 200 लोग इसमें शामिल थे। कांग्रेस के कई प्रमुख नेता, जिनमें कवासी लखमा, नंदकुमार पटेल, दिनेश पटेल, महेंद्र कर्मा, मलकीत सिंह गैदू और उदय मुदलियार समेत अन्य नेता शामिल थे।
शाम करीब 4 बजे काफिला झीरम घाटी से गुजर रहा था। इसी दौरान रास्ते में पेड़ गिराकर रास्ता रोक दिया गया। इसके बाद घात लगाए बैठे नक्सलियों ने काफिले पर फायरिंग शुरू कर दी।
करीब डेढ़ घंटे तक चली इस हिंसक घटना के बाद नक्सलियों ने कथित तौर पर वाहनों की तलाशी ली। हमले में कांग्रेस के कई बड़े नेताओं समेत दर्जनों लोगों की मौत हुई थी।
महेंद्र कर्मा को बताया गया था मुख्य निशाना
हमले में तत्कालीन कांग्रेस नेता और बस्तर टाइगर के नाम से चर्चित महेंद्र कर्मा को मुख्य निशाना बनाए जाने की बात सामने आई थी।
घटना के बाद नक्सलियों की ओर से हमले की जिम्मेदारी ली गई थी। इस घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया था और छत्तीसगढ़ में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी गंभीर सवाल उठे थे।
कांग्रेस ने सुरक्षा चूक के लगाए थे आरोप
घटना के बाद कांग्रेस ने छत्तीसगढ़ सरकार और पुलिस पर सुरक्षा व्यवस्था में चूक के आरोप लगाए थे। केंद्र सरकार ने मामले की जांच NIA को सौंप दी थी।
NIA ने जांच के दौरान कई आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया और जांच आगे बढ़ाई। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, जांच के बाद 11 लोगों को गिरफ्तार किया गया। इनमें से एक आरोपी की अभियोजन के दौरान मौत हो गई, जबकि अन्य आरोपी मामले में न्यायिक प्रक्रिया का सामना कर रहे हैं।
फैसले से पहले भूपेश बघेल ने उठाए NIA जांच पर सवाल
झीरम घाटी मामले में दोनों पक्षों की दलीलें पूरी हो चुकी हैं। ऐसे में 31 अगस्त को फैसले की उम्मीद थी, लेकिन अदालत ने अब निर्णय की तारीख 5 सितंबर कर दी है।
फैसले से पहले पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने NIA की जांच पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि FIR में नामजद लोगों से पूछताछ नहीं की गई और घटनास्थल पर मौजूद कई लोगों के बयान भी दर्ज नहीं किए गए।
बघेल का आरोप है कि घटना के पीछे कथित षड्यंत्रकारियों तक पहुंचने की दिशा में जांच नहीं हुई। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री से मामले की जांच राज्य सरकार को सौंपने की मांग की थी।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि राज्य में मौजूदा भाजपा सरकार ने मामले की आगे जांच के लिए कोई कदम नहीं उठाया। हालांकि, ये सभी राजनीतिक आरोप हैं और इन पर अंतिम निष्कर्ष अदालत के फैसले तथा आधिकारिक जांच रिकॉर्ड के आधार पर ही निकलेगा।
TS सिंहदेव बोले- मैं खुद था प्रत्यक्षदर्शी
इससे पहले पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव भी झीरम घाटी हमले को लेकर बयान दे चुके हैं। उन्होंने कहा था कि वह खुद घटना के प्रत्यक्षदर्शी रहे हैं और जगदलपुर पहुंचकर NIA के सामने अपनी आंखों देखी घटना का बयान दर्ज करा चुके हैं।
सिंहदेव ने दावा किया था कि घटना के दिन पूरे इलाके में पुलिस की मौजूदगी बेहद कम थी और रास्ते में पर्याप्त सुरक्षा बल तैनात नहीं था।
उन्होंने कहा था कि उनके बयान में घटना से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं को दर्ज कराया गया है और यदि जांच तथा अदालत के फैसले में इन तथ्यों को उचित स्थान मिलता है और जिम्मेदारी तय होती है, तभी पीड़ित परिवारों और कांग्रेस नेताओं को न्याय मिलने का संतोष होगा।
अब 5 सितंबर पर टिकी निगाहें
झीरम घाटी हमले को करीब 13 साल बीत चुके हैं, लेकिन इस मामले में न्याय और कथित साजिश को लेकर सवाल अब भी चर्चा में हैं। NIA कोर्ट में दोनों पक्षों की दलीलें पूरी होने के बाद अब फैसला 5 सितंबर को आने की उम्मीद है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि अदालत के फैसले में किन आरोपों और तथ्यों पर मुहर लगेगी और 13 साल पुराने इस मामले में न्यायिक तस्वीर किस तरह सामने आएगी।
