राजगढ़: मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले में खाटू श्याम मंदिर के निर्माण को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। ब्यावरा तहसील के लखनवास क्षेत्र में बड़ली माता मंदिर की पहाड़ी पर बन रहे मंदिर के निर्माण को प्रशासन ने जेसीबी की मदद से हटा दिया। कार्रवाई के दौरान 100 से अधिक पुलिसकर्मी और प्रशासनिक अमला मौके पर मौजूद रहा।
प्रशासन की इस कार्रवाई के बाद ग्रामीणों में नाराजगी फैल गई। ग्रामीणों का कहना है कि जिस जगह पर मंदिर बनाया जा रहा था, वह किसी एक व्यक्ति की जमीन या निजी आस्था का मामला नहीं, बल्कि आसपास के करीब 15 गांवों की सामूहिक धार्मिक आस्था से जुड़ा था। वहीं प्रशासन का कहना है कि निर्माण सरकारी जमीन पर किया जा रहा था और इसे अतिक्रमण के तहत हटाया गया है।
चंदा जुटाकर 15 गांवों ने शुरू कराया था मंदिर निर्माण
ग्रामीणों के मुताबिक, बड़ली माता की पहाड़ी पर खाटू श्याम मंदिर बनाने की पहल आसपास के करीब 15 गांवों के लोगों ने मिलकर की थी।
मंदिर निर्माण के लिए ग्रामीणों ने आपस में चंदा इकट्ठा किया और सामूहिक भागीदारी से निर्माण कार्य शुरू कराया था। ग्रामीणों का दावा है कि मंदिर उनके लिए सिर्फ एक इमारत नहीं था, बल्कि लंबे समय से जुड़ी धार्मिक भावनाओं और सामूहिक प्रयास का प्रतीक था।
इसी वजह से निर्माण हटाए जाने के बाद ग्रामीणों में काफी नाराजगी देखी गई।
ग्रामीण बोले- न नोटिस मिला, न पक्ष रखने का मौका
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने निर्माण हटाने से पहले उन्हें पर्याप्त जानकारी नहीं दी। उनका दावा है कि कार्रवाई से पहले उन्हें न तो नोटिस मिला और न ही अपना पक्ष रखने का पर्याप्त अवसर दिया गया।
ग्रामीणों का कहना है कि अगर निर्माण में कोई कानूनी समस्या थी तो प्रशासन को पहले बातचीत करनी चाहिए थी। उनका आरोप है कि अचानक जेसीबी चलाकर निर्माण हटा दिया गया, जिससे लोगों की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं।
हालांकि, प्रशासन ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा है कि संबंधित पक्ष को नियमानुसार नोटिस जारी किए गए थे।
क्रेशर और अवैध खनन को लेकर भी उठे सवाल
मंदिर हटाए जाने के बाद ग्रामीणों ने प्रशासन पर दूसरे गंभीर आरोप भी लगाए। उनका दावा है कि पहाड़ी क्षेत्र में क्रेशर मशीन लगाने और कथित अवैध खनन के लिए रास्ता साफ करने की कोशिश की जा रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में लंबे समय से अवैध खनन और ब्लास्टिंग को लेकर शिकायतें की जाती रही हैं। उनका आरोप है कि इन शिकायतों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई, लेकिन मंदिर का निर्माण शुरू होते ही प्रशासन ने तेजी से कार्रवाई कर दी।
हालांकि, अवैध खनन और क्रेशर को लेकर ग्रामीणों के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं हुई है।
तहसीलदार बोले- सरकारी जमीन से हटाया गया अतिक्रमण
वहीं प्रशासन ने ग्रामीणों के आरोपों को सिरे से खारिज किया है। ब्यावरा के तहसीलदार रामनिवास धाकड़ ने कहा कि कार्रवाई किसी धार्मिक स्थल को निशाना बनाने के लिए नहीं, बल्कि सरकारी जमीन से अतिक्रमण हटाने के लिए की गई है।
तहसीलदार के मुताबिक, कार्रवाई अचानक नहीं की गई थी। संबंधित पक्ष को नियमों के तहत पहले ही नोटिस जारी किए गए थे। इसके बाद वैधानिक प्रक्रिया पूरी करते हुए निर्माण हटाया गया।
प्रशासन का कहना है कि सरकारी जमीन पर किसी भी प्रकार का अतिक्रमण स्वीकार नहीं किया जाएगा और नियमों के अनुसार कार्रवाई जारी रहेगी।
एक तरफ आस्था, दूसरी तरफ सरकारी जमीन का दावा
बड़ली माता पहाड़ी पर हुई कार्रवाई के बाद मामला दो अलग-अलग दावों के बीच उलझ गया है। ग्रामीण इसे 15 गांवों की सामूहिक आस्था और चंदे से शुरू हुआ मंदिर निर्माण बता रहे हैं, जबकि प्रशासन इसे सरकारी जमीन पर किया गया अतिक्रमण मान रहा है।
फिलहाल मंदिर निर्माण हटाए जाने के बाद क्षेत्र में ग्रामीणों और प्रशासन के बीच मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं। ग्रामीण कार्रवाई का विरोध कर रहे हैं, जबकि प्रशासन अपने कदम को पूरी तरह नियमों के अनुरूप बता रहा है।
अब सवाल यही है कि क्या यह मामला सिर्फ सरकारी जमीन से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई है या इसके पीछे पहाड़ी क्षेत्र को लेकर कोई बड़ा विवाद भी है? इस पर आने वाले दिनों में तस्वीर और साफ हो सकती है।
