नई दिल्ली: OBC क्रीमी लेयर को लेकर एक बार फिर विवाद गहरा गया है। केंद्र सरकार ने 25 अगस्त 2026 को सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाते हुए 11 मार्च 2026 के आदेश में स्पष्टीकरण और बदलाव की मांग की। सरकार का कहना है कि इस आदेश की कुछ व्याख्याओं से अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के आरक्षण लाभ पर असर पड़ सकता है।
हालांकि, केंद्र को सुप्रीम कोर्ट से तत्काल राहत नहीं मिली। मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की पीठ ने अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया। केंद्र ने इस मामले में उसी बेंच के गठन का अनुरोध किया है, जिसने 11 मार्च को मूल फैसला सुनाया था।
आखिर 11 मार्च के फैसले में क्या कहा गया था?
सुप्रीम कोर्ट ने 11 मार्च 2026 को OBC में क्रीमी लेयर निर्धारित करने के तरीके को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी की थी।
कोर्ट ने कहा था कि OBC क्रीमी लेयर तय करने के लिए सिर्फ माता-पिता की वेतन आय को एकमात्र आधार नहीं बनाया जा सकता। खास तौर पर PSU, बैंक या निजी क्षेत्र में काम करने वाले माता-पिता की सैलरी अधिक होने के आधार पर उनके बच्चों को सिर्फ इसी वजह से OBC आरक्षण के लाभ से बाहर नहीं किया जा सकता।
मामले की सुनवाई जस्टिस पीएस नरसिम्हा और आर. महादेवन की पीठ ने की थी। पीठ ने इस तरह का भेदभाव संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 16 में निहित समानता के सिद्धांत के संदर्भ में देखा था।
केंद्र सरकार को किस बात की चिंता है?
अब केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के सामने अपनी चिंता जाहिर की है। सरकार का तर्क है कि 11 मार्च के आदेश की व्याख्या अगर इस तरह की गई कि माता-पिता की आय को क्रीमी लेयर तय करने में महत्व ही न दिया जाए, तो इसका OBC-NCL व्यवस्था पर व्यापक असर पड़ सकता है।
सरकार ने आशंका जताई है कि ड्राइवर, चपरासी, क्लर्क जैसे कर्मचारियों के बच्चे भी क्रीमी लेयर से बाहर होने के दायरे में आ सकते हैं, जिससे OBC-NCL और EWS के बीच अंतर को लेकर भी व्यावहारिक सवाल खड़े हो सकते हैं।
इसी वजह से केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से फैसले पर जरूरी दिशा-निर्देश और स्पष्टीकरण मांगा है।
100 OBC उम्मीदवारों का मामला भी जुड़ा है
यह विवाद उस मामले से भी जुड़ा है, जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने 2016 के बाद सिविल सेवा परीक्षा में चयनित करीब 100 OBC उम्मीदवारों के दावों पर विचार करने का आदेश दिया था।
केंद्र सरकार का कहना है कि इस मामले में 11 मार्च के फैसले के प्रभाव और उसके क्रियान्वयन को लेकर स्पष्टता जरूरी है। इसी को लेकर सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से मामले की दोबारा स्पष्ट व्याख्या करने का अनुरोध किया है।
फिलहाल अंतरिम राहत से इनकार
केंद्र की मांग पर सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत की पीठ ने फिलहाल किसी भी तरह की अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया है। यानी तत्काल तौर पर 11 मार्च के आदेश पर रोक या उसके प्रभाव को बदलने जैसा कोई अंतरिम आदेश नहीं दिया गया।
अब सबकी नजर इस बात पर है कि सुप्रीम कोर्ट केंद्र की ओर से मांगे गए स्पष्टीकरण और समान बेंच के गठन के अनुरोध पर आगे क्या रुख अपनाता है।
OBC आरक्षण और क्रीमी लेयर से जुड़े इस मामले का असर बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों और आरक्षण व्यवस्था पर पड़ सकता है, इसलिए आने वाले दिनों में सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
