रायपुर, 24 अगस्त 2026: छत्तीसगढ़ की महतारी वंदन योजना नारायणपुर जिले की हजारों महिलाओं के लिए सिर्फ आर्थिक सहायता का माध्यम नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता और आत्मसम्मान की नई राह बनती जा रही है। हर महीने मिलने वाली 1,000 रुपये की सहायता राशि से महिलाएं घर की जरूरतें पूरी करने के साथ बच्चों की पढ़ाई, दवाइयों और भविष्य की जरूरतों के लिए भी पैसे बचा पा रही हैं।
नारायणपुर जिले के सुदूर और ग्रामीण इलाकों में योजना का सीधा लाभ पहुंच रहा है। जिले की 27 हजार 272 पात्र महिलाओं को डीबीटी के जरिए नियमित आर्थिक सहायता मिल रही है।
27,272 महिलाओं को हर महीने मिल रहा आर्थिक सहारा
नारायणपुर भौगोलिक रूप से विस्तृत और मुख्य रूप से ग्रामीण क्षेत्र वाला जिला है। यहां 419 गांव और 2 विकासखंड हैं। ऐसे में हर महीने खाते में पहुंचने वाली निश्चित राशि गरीब और ग्रामीण परिवारों के लिए बड़ा सहारा साबित हो रही है।
योजना के पहले चरण में जिले की 26 हजार 710 पात्र महिलाओं को लगातार लाभ मिल रहा है। वहीं दूसरे चरण में नियद नेल्लानार के तहत सुदूर क्षेत्रों की 562 अतिरिक्त महिलाओं को योजना से जोड़ा गया।
इस तरह अब जिले में कुल 27 हजार 272 महिलाएं योजना का लाभ उठा रही हैं।
30 किस्तों में खातों में पहुंच चुके ₹74.66 करोड़
महतारी वंदन योजना की शुरुआत से अब तक नारायणपुर जिले की लाभार्थी महिलाओं को 30 किस्तों के माध्यम से कुल 74 करोड़ 66 लाख 42 हजार 300 रुपये सीधे उनके बैंक खातों में जमा किए जा चुके हैं।
डीबीटी के जरिए राशि सीधे खाते में पहुंचने से महिलाओं को आर्थिक सहायता के लिए किसी बिचौलिए पर निर्भर नहीं रहना पड़ता।
राशन से लेकर दवाइयों और बच्चों की पढ़ाई तक में मदद
हर महीने मिलने वाली यह राशि महिलाओं के लिए छोटी-छोटी लेकिन जरूरी जरूरतों को पूरा करने में काफी मददगार साबित हो रही है।
कई महिलाएं इस पैसे का इस्तेमाल राशन, भोजन और जरूरी दवाइयों के लिए कर रही हैं। वहीं बच्चों की स्कूल फीस, पढ़ाई की सामग्री और कपड़ों जैसी जरूरतों को पूरा करना भी आसान हुआ है।
घरेलू खर्च के बाद कुछ महिलाएं इस राशि को भविष्य की जरूरतों के लिए बचाने की कोशिश भी कर रही हैं।
त्योहारों और विशेष अवसरों पर समय पर मिलने वाली सहायता राशि महिलाओं के लिए अतिरिक्त खुशी और आत्मविश्वास का कारण बन रही है।
महिलाओं के साथ गांव के बाजार को भी मिला फायदा
योजना का असर सिर्फ लाभार्थी महिलाओं और उनके परिवारों तक सीमित नहीं है। जब ग्रामीण महिलाओं के हाथ में नियमित रूप से खर्च करने योग्य राशि पहुंचती है, तो इसका असर स्थानीय हाट-बाजारों और छोटी दुकानों पर भी दिखाई देता है।
जरूरत का सामान खरीदने से स्थानीय दुकानदारों और छोटे व्यापारियों का कारोबार बढ़ता है। इस तरह योजना से गांव की अर्थव्यवस्था में भी आर्थिक गतिविधियों को गति मिल रही है।
अब परिवार के फैसलों में भी बढ़ी भागीदारी
आर्थिक मजबूती के साथ महिलाओं का परिवार में आत्मविश्वास भी बढ़ा है। पहले छोटी-छोटी जरूरतों के लिए दूसरों पर निर्भर रहने वाली महिलाएं अब अपने पास उपलब्ध राशि से जरूरी खर्च खुद तय कर पा रही हैं।
इससे परिवार के आर्थिक फैसलों में उनकी भागीदारी और निर्णय लेने की क्षमता भी मजबूत हो रही है।
नारायणपुर की महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता की नई शुरुआत
महतारी वंदन योजना ने नारायणपुर जैसे दूरस्थ जिले में महिलाओं को नियमित आर्थिक संबल देने का काम किया है। हर महीने की यह सहायता राशि परिवार की जरूरतों को पूरा करने के साथ महिलाओं के भीतर आत्मविश्वास और आत्मसम्मान भी बढ़ा रही है।
27 हजार 272 महिलाओं तक पहुंचा यह लाभ इस बात की तस्वीर पेश करता है कि नियमित आर्थिक सहायता किस तरह ग्रामीण परिवारों की रोजमर्रा की जिंदगी में बदलाव ला सकती है।
₹1000 की मदद, लेकिन असर हजारों गुना
नारायणपुर की महिलाओं के लिए हर महीने खाते में आने वाली ₹1,000 की राशि भले ही एक निश्चित आर्थिक सहायता हो, लेकिन इसके जरिए घर की जरूरतें पूरी करने, बच्चों की पढ़ाई और स्वास्थ्य का ध्यान रखने से लेकर महिलाओं की निर्णय क्षमता बढ़ने तक कई स्तरों पर बदलाव दिखाई दे रहा है।
यही वजह है कि महतारी वंदन योजना जिले की हजारों महिलाओं के लिए आर्थिक सहारे से आगे बढ़कर आत्मनिर्भरता और सम्मान का जरिया बनती नजर आ रही है।
