रायपुर, 24 अगस्त 2026: खेतों और खाली जमीनों में तेजी से फैलने वाली गाजरघास यानी पार्थेनियम अब बीजापुर में जागरूकता अभियान का केंद्र बन गई है। यह खरपतवार देखने में भले ही सामान्य लगे, लेकिन फसलों की उत्पादकता घटाने के साथ मानव स्वास्थ्य, पशुओं और पर्यावरण पर भी प्रतिकूल असर डाल सकती है।
इसी खतरे को देखते हुए बीजापुर में कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) के नेतृत्व में 16 से 22 अगस्त 2026 तक सात दिवसीय ‘गाजरघास जागरूकता एवं उन्मूलन सप्ताह’ आयोजित किया गया। अभियान में स्कूलों से लेकर खेतों तक विद्यार्थियों, किसानों और ग्रामीणों को गाजरघास की पहचान, इसके नुकसान और सुरक्षित तरीके से उन्मूलन की जानकारी दी गई।
एक पौधा पैदा करता है हजारों बीज, इसलिए समय रहते रोकना जरूरी
गाजरघास का वैज्ञानिक नाम पार्थेनियम हिस्टेरोफोरस है। यह तेजी से फैलने वाली हानिकारक खरपतवार है, जो खेतों में फसलों के विकास को प्रभावित कर सकती है।
एक पौधे से बड़ी संख्या में बीज पैदा होने के कारण इसका फैलाव तेजी से होता है। अगर शुरुआत में ही इसे नियंत्रित नहीं किया जाए तो यह खेतों और आसपास के खाली इलाकों में तेजी से फैल सकती है।
बीजापुर में अभियान के दौरान किसानों को बताया गया कि गाजरघास को शुरुआती अवस्था में ही पहचानकर नियंत्रित करना ज्यादा प्रभावी है।
फसल की पैदावार में 20 से 30% तक कमी का खतरा
अभियान के दौरान किसानों और ग्रामीणों को गाजरघास के संभावित नुकसान के बारे में जानकारी दी गई। जिले में इसके फैलाव से फसलों की उत्पादकता में 20 से 30 प्रतिशत तक कमी आने की संभावना बताई गई है।
इसके अलावा यह खरपतवार मिट्टी की गुणवत्ता और आसपास के पारिस्थितिकी तंत्र पर भी असर डाल सकती है। पशुओं के स्वास्थ्य पर भी इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका रहती है।
इंसानों के लिए भी बन सकती है परेशानी
गाजरघास के संपर्क में आने से कुछ लोगों में त्वचा संबंधी एलर्जी हो सकती है। इसके अलावा सांस से जुड़ी समस्याएं भी उत्पन्न हो सकती हैं।
इसी वजह से अभियान के दौरान लोगों को सिर्फ गाजरघास हटाने की जानकारी नहीं दी गई, बल्कि इसे हटाते समय सुरक्षा सावधानियां बरतने पर भी जोर दिया गया।
स्कूलों में पहुंचा जागरूकता का संदेश
अभियान के तहत केंद्रीय विद्यालय बीजापुर, स्वामी आत्मानंद हिंदी माध्यम स्कूल बीजापुर, शासकीय कन्या विद्यालय ज्ञानगुड़ी और पीएम श्री जवाहर नवोदय विद्यालय बीजापुर सहित विभिन्न स्कूलों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए।
विद्यार्थियों को गाजरघास की पहचान, उसके नुकसान और समय रहते इसे हटाने की जरूरत के बारे में बताया गया।
अभियान में बच्चों को जागरूकता का वाहक बनाने पर भी जोर दिया गया, ताकि वे अपने घर और आसपास के ग्रामीणों तक भी गाजरघास से बचाव का संदेश पहुंचा सकें।
किसानों को बताया- कैसे सुरक्षित तरीके से हटाएं गाजरघास
बीजापुर के कोतापाल, मुसालूर, धनौरा, पापनपाल और दुगेली समेत कई ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों और महिला कृषकों को गाजरघास के नियंत्रण की जानकारी दी गई।
किसानों को बताया गया कि फूल आने से पहले दस्ताने और मास्क पहनकर गाजरघास को जड़ सहित निकालना सुरक्षित नियंत्रण का एक तरीका है। इसके अलावा जैविक और रासायनिक नियंत्रण के उपायों की जानकारी भी दी गई।
गैर-कृषि भूमि में अनुशंसित शाकनाशियों के इस्तेमाल और जैविक नियंत्रण के लिए मैक्सिकन बीटल के उपयोग के बारे में भी जानकारी दी गई।
विद्यार्थियों और किसानों ने मिलकर हटाई गाजरघास
सात दिवसीय अभियान में सैकड़ों विद्यार्थी, किसान और किसान मित्र शामिल हुए। इस दौरान सार्वजनिक स्थानों और खेतों से गाजरघास हटाने के लिए सफाई अभियान भी चलाया गया।
इस पहल के जरिए ग्रामीणों को संदेश दिया गया कि गाजरघास के फैलाव को रोकना सिर्फ किसी एक विभाग की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि समुदाय की भागीदारी से ही इसे प्रभावी तरीके से नियंत्रित किया जा सकता है।
गाजरघास के खिलाफ अब जागरूकता ही सबसे बड़ा हथियार
बीजापुर में चलाया गया यह अभियान सिर्फ सात दिनों की गतिविधि नहीं, बल्कि किसानों और ग्रामीणों को लंबे समय तक गाजरघास के प्रति सतर्क करने की कोशिश है। समय पर पहचान, सुरक्षित उन्मूलन और सामूहिक भागीदारी से इस हानिकारक खरपतवार के फैलाव को रोका जा सकता है।
स्कूलों से लेकर खेतों तक चले इस अभियान ने विद्यार्थियों, किसानों और ग्रामीणों को एक साथ जोड़कर सुरक्षित खेती, स्वस्थ पर्यावरण और बेहतर ग्रामीण स्वास्थ्य की दिशा में जागरूकता का संदेश दिया है।
